ऑफिस में आठ से दस घंटे कंप्यूटर पर काम और उसके बाद घंटों मोबाइल देखने की आदत आंखों पर भारी पड़ रही है। शहर के नेत्र विशेषज्ञों के पास डिजिटल आई स्ट्रेन के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। रोजाना एक नेत्र विशेषज्ञ के पास ही 30 से 40 केस आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार लगातार स्क्रीन देखने से पलकें झपकाना कम हो जाता है, जिससे आंखों की नमी घटती है। डॉक्टरों का कहना है कि डिजिटल आई स्ट्रेन लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्या है। हर 20 मिनट में स्क्रीन से नजरें हटाएं बच्चों और युवाओं में डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। डिजिटल उपकरणों का उपयोग पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है, लेकिन संतुलन और समझदारी बेहद जरूरी है। सूखी आंखों से बचने को पलकें झपकाने की आदत डालें। हर 20 मिनट में कुछ सेकेंड के लिए नजरें स्क्रीन से हटा दूर देखें। स्क्रीन की ब्राइटनेस रोशनी के अनुसार रखें। सोने से एक घंटा पहले मोबाइल या अन्य स्क्रीन बंद कर दें। रोजाना कम से कम 8 घंटे की नींद लें। गुनगुने पानी में साफ कपड़ा भिगोकर हल्की सिकाई करने से भी आराम मिलता है। पर्याप्त पानी पिएं, सलाद और हरी सब्जियां खाएं। नियमित जांच कराएं। रोज सूखापन, सिर व गर्दन दर्द से परेशान 30 से 40 मरीज पहुंच रहे डॉ. रमेश, नेत्र विशेषज्ञ केस 1: आंखों में लगातार जलन : निजी कंपनी में कार्यरत 27 वर्षीय युवक रोजाना लगभग नौ घंटे कंप्यूटर पर बाद में मोबाइल पर वेब सीरीज देखता था। उसकी आंखों में जलन और भारीपन रहने लगा। सिरदर्द और गर्दन दर्द भी बढ़ गया। जांच में डिजिटल आई स्ट्रेन निकला। डॉक्टर ने स्क्रीन टाइम घटवाया। बीच-बीच में ब्रेक लेने से राहत मिली। केस 2 : प्रतियोगी परीक्षा में जुटी छात्रा को धुंधला दिखने लगा : 22 वर्षीय छात्रा ऑनलाइन क्लास और नोट्स के कारण दिन का अधिकतर समय लैपटॉप पर बिताती थी। रात में मोबाइल इस्तेमाल करने से नींद भी प्रभावित हुई। धीरे-धीरे उसे धुंधला दिखने लगा। अब वह हर 20 मिनट बाद नजरें हटाकर दूर देखती है। केस 3 : लैपटॉप पर काम से आंखों-गर्दन में जकड़न : 25 वर्षीय युवा झुककर लैपटॉप चलाता था। आंखों के साथ-साथ उसे गर्दन में जकड़न और दर्द हुआ। नेत्र विशेषज्ञ ने गलत मुद्रा में बैठने व बिना रुके स्क्रीन देखना वजह बताया।


