भास्कर न्यूज | बैकुंठपुर ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू हिंसा, पारिवारिक कलह और छोटे-मोटे विवादों के निपटारे के लिए अब महिलाओं को थानों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। जिला प्रशासन की पहल पर अब इन समस्याओं का समाधान गांव की चौपाल पर नारी अदालत के माध्यम से होगा। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ग्राम पंचायत सलका में नारी अदालत का एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण ग्राम पंचायत मनसुख और सलका की नारी अदालत के सदस्यों के लिए रखा गया था। यह पहल भारत सरकार के मिशन शक्ति योजना के अंतर्गत संचालित की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायत स्तर पर महिलाओं को एक सुलभ और न्याय मंच प्रदान करना है। नारी अदालत के माध्यम से महिलाओं को घरेलू हिंसा और पारिवारिक कलह, दहेज प्रताड़ना से संबंधित मामले, संपत्ति में अधिकार की कटौती सहित अन्य सामाजिक व कानूनी समस्याओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान सदस्यों को बारीकियों से अवगत कराया गया, जिसमें शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया और साक्ष्यों का विश्लेषण, आपसी सहमति से विवादों को सुलझाने के तरीके, महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों और शासकीय योजनाओं की जानकारी देना और पीड़ित महिलाओं को मानसिक और कानूनी सहयोग प्रदान करना शामिल है। कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को एक ऐसा सशक्त मंच देना है जहां उन्हें त्वरित, निष्पक्ष और किफायती न्याय मिल सके। नारी अदालत केवल विवाद सुलझाने का केंद्र नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का एक सुरक्षा कवच भी है। नारी अदालत में समाज और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय महिलाओं को शामिल किया गया है, जो पूरी पारदर्शिता के साथ मामलों की सुनवाई करेंगी। इससे न केवल कानूनी बोझ कम होगा, बल्कि ग्रामीण परिवेश में महिलाओं के आत्मविश्वास में भी वृद्धि होगी।


