बिलासपुर| श्री सिद्ध शक्तिपीठ शीतला माता मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन हुआ। कथा व्यास आचार्य योगेश तिवारी ने श्रोताओं को कथा श्रवण कराते हुए आत्मा और परमात्मा के मिलन को जीवन का सर्वोच्च आनंद बताया। उन्होंने कहा कि कथा रूपी अमृत का पान करने से साधारण मनुष्य भक्त बन जाता है। कथा में भगवान श्रीकृष्ण के पापी कंस का वध कर उग्रसेन का राजतिलक करने और मथुरा का राज्य सौंपने, तथा द्वारिका नगरी में देवी रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का वर्णन कर भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कथा वाचक ने जीवन के उतार-चढ़ाव का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी धूप, कभी छाया आती है, पर ईष्ट की भक्ति कभी नहीं छोड़नी चाहिए। भक्ति केवल स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि कर्म के साथ निरंतर बनाए रखनी चाहिए।


