छात्रों के पते पर नहीं भेजा जा रहा उपाधि प्रमाण पत्र

भास्कर न्यूज | कोरबा जिले के सरकारी व निजी कॉलेज अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी बिलासपुर से संबद्ध हैं। छात्रों को पढ़ाई पूर्ण होने के बाद उपाधि प्रमाण पत्र की समय बेसमय जरूरत पड़ती है। जिसे यूनिवर्सिटी प्रबंधन छात्रों को उनके घर के पते पर नहीं भेजता है। यूजी व पीजी कोर्स करने वाले छात्रों को इसके लिए अनावश्यक परेशान होना पड़ता है। इसकी पूर्ति के लिए यूनिवर्सिटी प्रबंधन छात्रों को डिजी लॉकर का उपयोग करने प्रोत्साहित करता है। हार्ड कॉपी चाहिए तो संबंधित छात्र को यूनिवर्सिटी में आवेदन कर प्राप्त करना होगा। इस प्रक्रिया के लिए दूर दराज में रहने वाले छात्रों को परेशानी होती है। जबकि उपाधि प्रमाण पत्र के एवज में छात्रों से अंतिम वर्ष अथवा अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा के लिए आवेदन करने के दौरान ऑनलाइन भुगतान पाप्त कर लिया जाता है। घर के पते पर भेजने की प्रक्रिया में अभी काफी सरलीकरण हुआ है। इसके बाद भी इस दिशा में ठोस पहल नहीं होने का खामियाजा स्थानीय छात्रों को भुगतना पड़ता है। ज्ञात हो कि प्रवेश लेने से लेकर, नामांकन फार्म भरने व परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन करने तक प्रति छात्रों से उनका डिटेल लिया जाता है। जिसमें छात्रों का स्थायी व अस्थायी पता भी होता है। उपाधि प्रमाण पत्र के लिए छात्रों को संबंधित कॉलेज के प्राचार्य अथवा राजपत्रित अधिकारी का हस्ताक्षर युक्त आवेदन फार्म जिसमें रोल नंबर, नामांकन क्रमांक/पंजीयन नाम हिंदी व अंग्रेजी में, पिता या पति का नाम, माता का नाम, परीक्षा का विषय, स्थायी पता आदि भरवाकर उसके साथ 375 रुपए उपाधि शुल्क के नाम पर जमा कराया जाता है। पहले नहीं थे संसाधन, अब सुविधा फिर भी नहीं भेज रहे उपाधि प्रमाण-पत्र को लेकर यूनिवर्सिटी प्रबंधन पुरानी पद्धति को ही फॉलो कर रही है। छात्रों का पढ़ाई के बाद होम टाउन बदलने से उपाधि प्रमाण पत्र नहीं मिल पाते थे। जिसके कारण यूनिवर्सिटी ने डॉक के बजाय छात्रों को मांगने पर दे रही थी। इस पद्धति को आज भी अपनाया जा रहा है। जबकि पहले संसाधन व सुविधाएं नहीं थी। टेक्नालाजी की कमी थी। आज हमेशा छात्र ऑनलाइन मौजूद रहते हैं। उनका मोबाइल नंबर लिया जाता है ताकि उनसे विशेष परिस्थिति में संपर्क किया जा सके। 28 कॉलेजों से हर साल 7 हजार छात्र होते हैं पासआउट कोरबा जिला में शासकीय व अशासकीय कॉलेजों की संख्या 28 कॉलेज हैं। इन कॉलेजों से नियमित एवं स्वाध्यायी छात्र के रूप में हर साल 7 हजार छात्र ऐसे होते हैं जो यूजी, पीजी व डिप्लोमा की अंतिम वर्ष की पढ़ाई पूरी कर आगे बढ़ जाते हैं। जिन्हें कोर्स पूरा होने के बाद उपाधि प्रमाण पत्र की जरूरत होती है। इन छात्रों से यूनिवर्सिटी को हर साल उपाधि प्रमाण पत्र के लिए करीब 26 लाख 25 हजार रुपए प्राप्त होते हैं। इसी तरह अन्य जिलों से भी शुल्क लिया जाता है। इतनी बड़ी राशि छात्रों से लेने के बाद उन्हें उपाधि प्रमाण पत्र नहीं मिलना समझ से परे है।

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