2 मार्च को रात 12.50 के बाद होलिका दहन, 3 को शाम 4.33 बजे तक पूर्णिमा, चार को होली

फाल्गुन पूर्णिमा दो दिन होने से इस बार होलिका दहन के एक दिन बाद रंगों का त्योहार होली मनाया जाएगा। फाल्गुन की पूर्णिमा (सोमवार) 2 मार्च की शाम 5.18 बजे से शुरू होकर (मंगलवार) 3 मार्च की शाम 4.33 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा पर इस बार भद्रा और चंद्रग्रहण का संयोग भी बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में होलिका दहन के लिए तीन नियम बताए गए हैं। इसके लिए रात्रिकाल, पूर्णिमा तिथि व भद्रा मुक्त काल होना चाहिए। व्रत की पूर्णिमा में सोमवार की शाम पूर्णिमा के साथ भद्रा भी शुरू हो रहा है, जो मंगलवार तक रहेगा। ऐसे में भद्रा के पुच्छ काल में सोमवार की मध्य रात्रि के बाद 12.50 बजे से 2.02 बजे के बीच होलिका दहन किया जाएगा। ज्योतिष प्रणव मिश्रा ने बताया कि सामान्यतः पूर्णिमा की रात्रि में होलिका दहन और अगले दिन प्रातःकाल रंगोत्सव (होली) मनाया जाता है, लेकिन इस बार पंचांग गणना और शास्त्रीय निर्णय के आधार पर पर्व-तिथियों में आंशिक परिवर्तन है। फाल्गुन पूर्णिमा का आरंभ 2 मार्च की सायंकाल से होकर 3 मार्च की सायंकाल तक रहेगा। पूर्णिमा लगते ही भद्रा का प्रवेश हो जाएगा। धर्मशास्त्रों में भद्रा के मुखकाल में शुभ कार्य वर्जित बताए गए हैं। भद्रा के पुच्छकाल में ही होलिका दहन करना चाहिए। इसी आधार पर 2 मार्च की अर्द्धरात्रि के बाद होलिका दहन होगा। 3 मार्च को सायंकाल चंद्रग्रहण का योग है। ग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। इसमें शुभ और मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। इसी कारण 3 मार्च को होली मनाना शास्त्रोचित नहीं है। पंडित कमल कांत दुबे के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 3 मार्च मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्योदयकालीन पूर्णिमा में कुलदेवी को सिंदूर अर्पण होगा। चंद्रग्रहण 3 मार्च को ग्रहण प्रारंभ दिन के 3.20 बजे पर होगा। ग्रहण का मध्य सायं 5.04 बजे व ग्रहण का मोक्ष सायं 06.47 बजे पर होगा। चंद्रोदय के समय भारत के सभी स्थानों में इस ग्रहण का मोक्ष दिखाई देगा। इस ग्रहण का प्रारंभ भारत के किसी स्थान में दिखाई नही देगा, क्योंकि चंद्रोदय होने से पूर्व ग्रहण प्रारंभ हो जाएगा। खंडग्रास चंद्रग्रहण का मोक्ष भारत के सुदूर पूर्वी भागों में दिखाई देगा। देश के बाकी हिस्सों में खंडचंद्र ग्रहण का मोक्ष ही दिखाई देगा। रांची में चंद्रोदय-सांय 05.51 बजे पर (दृश्य ग्रहण काल 56 मिनट) होगा। सूतक 9 घंटे पूर्व प्रारंभ हो जाएगा। यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व सिंह राशि में लगेगा। होली ग्रह-नक्षत्रों के शुभ संयोग में 4 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन सुबह 7:27 बजे तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व इसके बाद पूरे दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का युग्म संयोग रहेगा। धृति योग भी विद्यमान होगा। वर्ष दिन 2020 : 10 मार्च 2021: 29 मार्च 2022 : 19 मार्च 2023: 08 मार्च 2024: 26 मार्च 2025: 15 मार्च 2026: 4 मार्च 3 मार्च : चंद्रग्रहण और सूतक, केवल पूजा-पाठ 4 मार्च : स्नान-शुद्धि के बाद रंगोत्सव यानी होली 2 मार्च (रात्रि) : भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *