तेलंगाना में नक्सल संगठन के महासचिव रहे पोलित ब्यूरो मेंबर देवजी उर्फ थिप्पिरी तिरूपति उर्फ कुम्मा दादा समेत 18 नक्सलियों ने दो दिन पहले सरेंडर कर दिया था, लेकिन तेलंगाना पुलिस ने चार शीर्ष नेताओं के आत्मसमर्पण की औपचारिक घोषणा मंगलवार को की है। इनमें देवजी के साथ सेंट्रल कमेटी मेंबर मुरली उर्फ संग्राम उर्फ मल्ला राजी रेड्डी, तेलंगाना स्टेट कमेटी मेंबर व सचिव दामोदर उर्फ बड़े चोक्का राव उर्फ जगन और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के मेंबर गगन्ना उर्फ नुने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ सन्नू दादा शामिल हैं। सभी नेता संगठन के शीर्ष ढांचे में लंबे समय तक सक्रिय रहे और करीब चार दशकों तक अंडरग्राउंड रहकर वारदातों की रणनीति सहित अन्य गतिविधियों में लिप्त थे। उनके सरेंडर को सुरक्षा एजेंसियां एंटी नक्सल ऑपरेशन्स के संदर्भ में एक बड़ा संकेत मान रही है। देवजी ने 62, तो संग्राम ने 76 वर्ष की उम्र में किया सरेंडर देवजी की उम्र 62 वर्ष हो चुकी है। वह सेंट्रल कमेटी मेंबर, पोलित ब्यूरो मेंबर के साथ सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का इंचार्ज भी रहा है। सेंट्रल कमेटी मेंबर संग्राम 76 वर्ष का है। इधर स्टेट कमेटी मेंबर व तेलंगाना स्टेट कमेटी का सचिव दामोदर 47 वर्ष और पीएलजीए की बटालियन नंबर 1 का स्टेट कमेटी मेंबर गगन्ना ने 62 वर्ष की उम्र में सरेंडर किया है। देवजी का सरेंडर हिंसा के अंत का संकेत पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने बताया कि नक्सलियों के शीर्ष संगठन के कैडर का आत्मसमर्पण शांति और स्थिरता की दिशा में सकारात्मक संकेत है। लंबे समय से प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयासों को इस सरेंडर से मजबूती मिलेगी। जिस बस्तर ने वर्षों तक हिंसा और अशांति का सामना किया है, अब स्थायी स्थिरता की दिशा में अपनी गति को और तेज करने की स्थिति में है। नक्सल नेतृत्व का क्रमिक रूप से कमजोर होना संगठन के पतन का संकेत है।


