भास्कर संवाददाता | सिरोही माउंट आबू के लोगों व पर्यटकों की प्यास बुझाने वाले 47 साल पुराने सालगांव प्रोजेक्ट के लिए उचित जमीन का चयन अब तक अटका हुआ है। वन विभाग ने जीरावल के पास 30 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की है। जिसकी रिपोर्ट बनाकर भिजवाई जाएगी। टीम फिर से निरीक्षण करेगी। अगर जमीन पर नियमानुसार प्रति हेक्टेयर 1100 पौधे लगाए जा सकेंगे, तो ही वन विभाग की स्वीकृति मिल पाएगी। बताया जाता है कि आगामी मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल माह तक वन विभाग की स्वीकृति मिलते ही सालगांव प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो सकता है। बता दें कि प्रोजेक्ट को लेकर जहां बांध बनना है, वह जमीन वन विभाग की होने के चलते पहले स्वीकृति नहीं मिली। बाद में अब सरकार ने पंचदेवल बांध के पास जमीन चिह्नित की। जमीन चिह्नित होने के बाद यहां प्रति हेक्टेयर 1100 पौधे लगाने का प्रावधान रखकर ऑनलाइन रिपोर्ट सरकार को भेजी। गत जनवरी में पहुंची टीम ने जमीन का निरीक्षण किया तो जमीन पथरीली होने के चलते इतने पौधे नहीं लगने का ऑब्जेशन लगाया था। बांध बनने से माउंटवासियों के लिए पेयजल का स्थायी समाधान के लिए यह प्रोजेक्ट जरूरी है। वर्तमान में अपर कोदरा व लोअर कोदरा बांध से पानी मिलता है। गर्मियों में ये सूख जाते हैं तो इमरजेंसी में नक्की झील से जलापूर्ति होती है। माउंट की आबादी 42 हजार है। 2071 की आबादी को आधार मानकर सालगांव बांध परियोजना तैयार की गई है। { 1977 में सालगांव बांध परियोजना 27 लाख की थी। बांध के निर्माण के लिए जगह प्रस्तावित थी, 1979 में तकनीकी बिंदुओं पर निरस्त कर दिया। { 1980 में फिर परियोजना शुरू, राजनीतिक और विभागीय दांवपेंच में फाइल अटकती रही। { 1996 में 11 करोड़ की डीपीआर बनाकर योजना फिर शुरू की। { 2012 को केंद्र की संसदीय समिति का मौका निरीक्षण { जुलाई 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री के समक्ष परियोजना का मुद्दा उठा, 2016 में राज्य वाइल्ड लाइफ बोर्ड की ओर से आंशिक संशोधन कर स्वीकृति देकर वन विभाग ने फाइल केंद्र सरकार को भिजवाई { 15 मई 2017 को नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड की ओर से परियोजना को स्वीकृति दी है { 6 अक्टूबर 2022 में प्रोजेक्ट की प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृत मिली, 250 करोड़ डीपीआर तैयार कर वर्कऑर्डर हो चुका { 13 मार्च 2025 को सांसद चौधरी ने लोकसभा में मुद्दा उठाया। फाइल जयपुर से लखनऊ भेजी। अधिकारियों से वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस पूरी की। ^साल गांव प्रोजेक्ट को लेकर पंचदेवल के पास जमीन चिह्नित कर रखी है। यहां प्रति हैक्टेयर 1100 पौधे लगाने है, लेकिन पथरीली जमीन होने का ऑब्जेक्शन आया है। जीरावल के पास 30 हैक्टेयर जमीन समतल जमीन चिह्नित की है। इसकी रिपोर्ट बनाकर भिजवाएंगे। – अमित ऊचौई, डीएफओ, सिरोही प्रोजेक्ट को लेकर गत जुलाई में सरकार से नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ का क्लीयरेंस मिला था। इसके बाद वन विभाग की स्वीकृति में अटका रहा। बता दें कि यह प्रोजेक्ट वर्ष 1977 में 27 लाख रुपए का प्रोजेक्ट बना था, लेकिन इस पर कोई काम नहीं हो पाया। बाद में 2022-23 में मुख्यमंत्री बजट घोषणा में 250.54 करोड़ रुपए इसी प्रोजेक्ट को वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी। प्रोजेक्ट स्वीकृत होने के बाद इसके निर्माण के लिए टेंडर जारी कर कोटा की मोहम्मद कंस्ट्रक्शन कंपनी को वर्कऑर्डर जारी किया। वन विभाग क्षेत्र के सालगांव व गंभीरी नालों के संगम पर बनने वाले इस बांध के निर्माण को लेकर 23.20 हेक्टेयर गैर वन भूमि होने के चलते विभाग से वाइल्ड लाइफ क्लीरेंस व फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिलने से अटका था। जुलाई में वाइल्ड लाइन क्लीयरेंस मिलने के बाद वन विभाग में राशि जमा नहीं करवाने के चलते प्रोजेक्ट अटका रहा था। ^काफी समय से सालगांव प्रोजेक्ट को वाइल्ड लाइफ की स्वीकृति मिली है। वन विभाग की स्वीकृति के लिए फाइल लगाई थी। पंचदेवल बांध के पास की जमीन का जनवरी में टीम ने निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश की, जिसमें मार्क लगाया कि पथरीली जमीन पर पौधे नहीं लगाए जा सकते। अब दूसरी जमीन चिह्नित कर रिपोर्ट भेजेंगे। – शिवप्रकाश मीणा, एक्सईएन जलसंसाधन विभाग, सिरोही


