होलाष्टक: 3 मार्च तक नहीं होंगे मंगल काज

भास्कर न्यूज | बलौदाबाजार होलाष्टक इस बार मंगलवार से शुरू हो गया है जो 3 मार्च तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक के ये दिन शुभ कार्यों के लिए अशुभ माने जाते हैं। इस दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नामकरण, भूमि या वाहन क्रय-विक्रय सहित सभी शुभ कार्य टालने की परंपरा है। हालांकि धार्मिक दृष्टि से यह समय जप, तप, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। पंडित पृथ्वी पॉल के अनुसार होलाष्टक का समापन होलिका दहन के साथ होता है। इधर ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 2 मार्च को होलिका दहन शास्त्र सम्मत बताया जा रहा है लेकिन कुछ जगहों पर 3 मार्च को भी होली जलाई जाएगी।
पं. पॉल ने बताया कि होलाष्टक का संबंध भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ा है। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को अनेक यातनाएं दीं और होलिका के साथ अग्नि में बैठाया। आठ दिन तक प्रह्लाद को विभिन्न कष्ट दिए गए, जिन्हें होलाष्टक के रूप में जाना जाता है। तभी से इन दिनों को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। पंडितों के अनुसार, इन दिनों में साधना, जप, मंत्र सिद्धि और भगवान की आराधना का विशेष महत्व है। भक्त भगवान विष्णु और हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, इस समय ऋतु परिवर्तन होता है, जिससे शरीर में बदलाव आते हैं। खान-पान और दिनचर्या में संयम रखने की सलाह दी जाती है। होलाष्टक के दिनों में तली-भुनी और भारी भोजन से बचने की परंपरा है। पंडितों के अनुसार 3 मार्च को दोपहर 3.20 बजे से शाम 6.46 बजे तक भद्रा रहेगी। इसके बाद रात 6.20 बजे से होलिका दहन का मुहूर्त रहेगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा पर 3 मार्च को पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में खंडग्रास चंद्रग्रहण लगने जा रहा है, जिसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा। पं. चुड़ामणि तिवारी ने बताया कि इस ग्रहण का ग्रास मान 1.15 रहेगा। सूतक काल 3 मार्च को सुबह 9 बजकर 07 मिनट से शुरू हो जाएगा। सूतक काल में भोजन, शयन और शुभ कार्य वर्जित होते हैं। बालक, वृद्ध और रोगियों पर सूतक के नियम मान्य नहीं होते हैं। विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, खरीद-बिक्री, नया व्यवसाय। इनका विशेष महत्व : भजन कीर्तन, जप-तप, धार्मिक अनुष्ठान, दान-पुण्य एवं महामृत्युंजय मंत्र जाप।

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