झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को ईडी अधिकारियों पर दर्ज प्राथमिकी के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस एके द्विवेदी की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। इस दौरान ईडी की ओर से वरीय अधिवक्ता एसवी राजू, जोहेब हुसैन, एके दास ने अदालत को बताया कि ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज केस में जांच योग्य कोई ठोस आधार नहीं है। दर्ज प्राथमिकी में पूरा मामला मनगढ़ंत है। इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप देनी चाहिए। क्योंकि उन्हें राज्य पुलिस की जांच में पक्षपात करने की आशंका है। उनकी ओर से अदालत को बताया गया कि ईडी अधिकारियों ने थाना में प्राथमिकी का आवेदन दिया है, लेकिन पेयजल विभाग के निलंबित क्लर्क संतोष पर अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से इस मामले की सीबीआई जांच कराने की ईडी की मांग का जोरदार विरोध किया गया। सरकार की ओर से कहा गया कि यह सामान्य आपराधिक मामला है। राज्य की एजेंसी इसकी जांच करने में सक्षम है। वहीं, दूसरी ओर सूचक संतोष कुमार की ओर से कहा गया कि ईडी अधिकारियों ने उसके साथ मारपीट की है। सदर अस्पताल से इलाज के बाद उसे फिर से ईडी कार्यालय ले जाया गया था। सभी पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।


