आम आदमी पार्टी ने राजधानी के पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर का मामला फिर से उठाया है, अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इसको लेकर जांच की रफ्तार और पुलिस कार्रवाई पर आप ने सवाल खड़े किए हैं। मामला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी दंपती से जुड़ा है, जिन्होंने आईवीएफ प्रक्रिया के जरिए संतान प्राप्ति के लिए सेंटर का रुख किया था। 25 दिसंबर 2023 को ऑपरेशन के माध्यम से जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद परिजनों ने बच्चों की अदला-बदली का आरोप लगाया था। परिवार का दावा है कि अस्पताल स्टाफ ने एक बेटा और एक बेटी होने की जानकारी दी थी, लेकिन बाद में दोनों बच्चियां सौंप दी गईं। संदेह के बाद पिता ने निजी स्तर पर डीएनए जांच कराई और मामला न्यायालय पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई एफआईआर मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा, जहां 19 जनवरी 2026 को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया। हालांकि आरोप है कि आदेश के तुरंत बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई और बाद में 6 फरवरी 2026 को मामला दर्ज किया गया। अब एफआईआर दर्ज हुए भी समय बीत रहा है, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
पीड़ित परिवार को अब भी इंतजार आप का कहना है कि परिवार को अब तक न्याय नहीं मिला है और न ही उनके बच्चे की स्थिति स्पष्ट की गई है। कानूनी जानकारों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दर्ज एफआईआर में देरी और गिरफ्तारी न होना जांच की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।
जांच की दिशा पर नजर पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठनों का कहना है कि इतने संवेदनशील मामले में तेजी से कार्रवाई होनी चाहिए थी।


