छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कक्षा पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षा के विरोध में दायर याचिका खारिज कर दी है। ये याचिका छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की ओर से लगाई गई थी। कोर्ट ने साफ कहा कि सीजी बोर्ड से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में परीक्षा स्कूल शिक्षा विभाग ही लेगा। इस फैसले के बाद प्रदेश के करीब 6200 निजी स्कूलों में हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के छात्रों की एकीकृत परीक्षा होगी और परीक्षा में पास–फेल का नियम भी लागू रहेगा। निजी स्कूल संगठन ने आरटीई कानून की धारा 16 और 30 का हवाला देकर परीक्षा का विरोध किया था। लेकिन अदालत में यह स्पष्ट हुआ कि केंद्र सरकार ने 16 दिसंबर 2024 को आरटीई कानून में संशोधन कर दिया है। संशोधन के अनुसार कक्षा पांचवीं और आठवीं में वार्षिक परीक्षा होगी और असफल होने पर छात्रों को उसी कक्षा में रोका जा सकेगा। मामले में विकास तिवारी ने हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर कहा कि कई निजी स्कूल सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर सीबीएसई का पाठ्यक्रम पढ़ा रहे हैं और अभिभावकों से महंगी किताबों के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि सीजी बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को राज्य सरकार की ओर से निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें दी जानी हैं, लेकिन निजी स्कूलों ने वर्षों से इन पुस्तकों का वितरण नहीं किया और आरटीई के गरीब छात्रों को भी महंगी निजी किताबें खरीदने को मजबूर किया गया। सुनवाई के बाद न्यायाधीश नरेश कुमार चंद्रवंशी ने निजी स्कूल संगठन की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि संशोधित कानून के बाद बोर्ड परीक्षा कराना पूरी तरह वैध है। तिवारी ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि इससे फर्जी सीबीएसई स्कूलों पर लगाम लगेगी। शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी और आरटीई के तहत पढ़ने वाले गरीब छात्रों को अब कक्षा 1 से 10 तक निःशुल्क किताबों का लाभ मिल सकेगा।


