परिवहन विभाग के नए नियमों के खिलाफ प्रदेशव्यापी आह्वान पर जैसलमेर में निजी बसों की हड़ताल दूसरे दिन बुधवार को भी जारी रही। ‘अखिल राजस्थान कांटेक्ट कैरिज बस एसोसिएशन’ के समर्थन में जिले के सभी निजी बस ऑपरेटरों ने बसों का संचालन पूरी तरह बंद रखा। जैसलमेर से संचालित होने वाले सभी 11 मुख्य रूटों की 65 से अधिक बसें खड़ी रहने से जिले की परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। सबसे ज्यादा मार उन यात्रियों पर पड़ी है जिन्होंने लंबी दूरी की स्लीपर बसों में हफ़्तों पहले बुकिंग कराई थी। निजी बसों के पहिए थमने का सीधा असर आम जनता पर पड़ा। जैसलमेर बस स्टैंड पर बुधवार को यात्रियों की भारी भीड़ देखी गई। निजी बसें बंद होने से यात्रियों का पूरा भार राजस्थान रोडवेज की बसों पर आ गया। बसें क्षमता से अधिक भरकर चलीं, जिससे बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानी हुई। मजबूरी में लोगों को निजी टैक्सियां और गाड़ियां महंगे किराए पर बुक करनी पड़ीं। विवाद की जड़-फिटनेस का ‘तुगलकी’ फरमान और भारी जुर्माना हड़ताल के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, राज्य सरकार का वह आदेश जिसके तहत अब कमर्शियल वाहनों की फिटनेस केवल अधिकृत निजी सेंटर्स पर ही होगी। जैसलमेर जैसे भौगोलिक दृष्टि से विशाल जिले में एक भी निजी फिटनेस सेंटर नहीं है। ऐसे में वाहन स्वामियों को 280 किलोमीटर दूर जोधपुर जाना पड़ रहा है। बस ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष जगदीश पुरोहित ने बताया, “एक भारी वाहन को जोधपुर ले जाने और वापस लाने में 560 किमी का सफर तय करना पड़ता है। इसमें केवल डीजल का खर्च 4 से 10 हजार रुपए आता है। टोल टैक्स और स्टाफ का भत्ता अलग। जो काम स्थानीय आरटीओ ऑफिस में कुछ घंटों में होता था, उसके लिए अब हजारों रुपए और कई दिन बर्बाद हो रहे हैं।” दूसरा कारण आरटीओ द्वारा की जा रही चालानी कार्रवाई है। संचालकों का आरोप है कि नियमों के पालन के बावजूद भारी-भरकम जुर्माने लगाकर उन्हें आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। वार्ता रही बेनतीजा, बुधवार को भी नहीं चली बसें एसोसिएशन के सदस्य कंवराजसिंह चौहान ने बताया कि जयपुर में प्रशासन के साथ दूसरे दौर की वार्ता भी विफल रही। सरकार ने आरसी सस्पेंड की गई बसों के डेटा मैच नहीं होने का हवाला देकर मांगें मानने से फिलहाल इनकार कर दिया है। चौहान ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सकारात्मक समाधान नहीं निकला, तो हड़ताल को और उग्र किया जाएगा। मंगलवार को जहां जोधपुर रूट की कुछ बसें दोपहर तक चली थीं, वहीं बुधवार को ग्रामीण रूटों समेत सभी सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं। रोडवेज में पैर रखने की जगह नहीं, बुकिंग हुई कैंसिल निजी बसों के पहिए थमने का सीधा असर आम जनता पर पड़ा। जैसलमेर बस स्टैंड पर बुधवार को यात्रियों की भारी भीड़ देखी गई। निजी बसें बंद होने से यात्रियों का पूरा भार राजस्थान रोडवेज की बसों पर आ गया। बसें क्षमता से अधिक भरकर चलीं, जिससे बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानी हुई। मजबूरी में लोगों को निजी टैक्सियां और गाड़ियां महंगे किराए पर बुक करनी पड़ीं।स्लीपर बस संचालकों ने ऑनलाइन बुकिंग कराने वाले यात्रियों को रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी है, वहीं ऑफलाइन बुकिंग वालों को मैसेज भेजकर यात्रा रद्द होने की सूचना दी गई। इन 11 रूटों पर थमी रफ्तार (प्रतिदिन का गणित) जैसलमेर से रोजाना 65 से अधिक बसें इन प्रमुख शहरों के लिए रवाना होती थीं, जो अब स्टैंड पर खड़ी हैं: “हम नियमानुसार संचालन को तैयार हैं, लेकिन जैसलमेर में फिटनेस सेंटर न होना और ऊपर से भारी जुर्माना लगाना अन्याय है। जब तक हमारी वाजिब मांगें नहीं मानी जातीं, अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।”— जगदीश पुरोहित, अध्यक्ष, बस ऑपरेटर यूनियन, जैसलमेर


