प्राइवेट बसों की हड़ताल जारी, सरकारी में भीड़:ऑपरेटर बोले- रोडवेज में सुविधा नहीं, हमने बदलाव किए फिर भी सरकार नहीं सुन रही

प्रदेश में RTO के खिलाफ प्राइवेट बस ऑपरेटर विरोध में उतर आए हैं। जोधपुर में भी बड़े शहरों और राज्यों में जाने वाली बसें बंद हैं। यहां रोजाना 200 से अधिक बसें चलती हैं। ये बसें राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, मध्यप्रदेश, बिहार, नई दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक सहित कई राज्यों में जाती हैं। अब हड़ताल के चलते बसों के काउंटर सूने पड़े हैं। वहीं एसोसिएशन के पदाधिकारी धरने पर बैठे हैं। दैनिक भास्कर से बात करते हुए ऑल इंडिया टूरिस्ट बस ऑनर्स एसोसिएशन के सह-सचिव राजेंद्र परिहार ने बताया- एसोसिएशन की रोजाना 2 हजार बसें चलती हैं। जो पुणे, मुंबई, सूरत, बेंगलूरु सहित कई शहरों के लिए चलती हैं। उन्होंने बताया कि सरकार बिना वजह 1 से डेढ़ लाख तक के चालान काट रही है। उन्होंने कहा- अब सरकार कह रही है कि नए नियम के अनुसार बस चलाओ, लेकिन जो बस वर्ष 2010 में बनी है। उसे अब नए नियमों के अनुसार कैसे बनाया जाए। सरकार ने हमें जो नॉर्म्स बताए थे, उन नॉर्म्स को हमने पूरा कर दिया है। उन्होंने बताया कि बसें बंद होने की वजह से 5-6 हजार लोग परेशान हो रहे हैं। बस ऑपरेटर ने कहा- रोडवेज बसों में फायर सेफ्टी से लेकर नियमों के अनुरूप बनावट नहीं है। इसलिए लोग सरकारी बसों को पसंद नहीं करते हैं। रोजाना डेढ़ से दो लाख यात्री रोजाना सफर करते
एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष विष्णु शर्मा ने बताया- इन बसों में रोजाना डेढ़ से दो लाख यात्री रोजाना सफर करते हैं। जो सुविधा हम उपलब्ध करवा रहे हैं, वो राज्य सरकार की किसी भी बसों में उपलब्ध नहीं है। हमारी छोटी से छोटी बस भी राज्य सरकार की बेहतर से बेहतर बस से अच्छी होती है। हम कम समय में लोगों को सुविधाजनक तरीके से अपने गंतव्य तक पहुंचाते हैं। जबकि रोडवेज हर वर्ष घाटे में चलती है, क्योंकि उनकी बसें सुविधाजनक नहीं हैं। अब परिवहन विभाग हमारी गाड़ियों को फिटनेस के अनुरूप नहीं बता रहा है, जबकि 5 साल पहले परिवहन विभाग ने ही हमारी बसों की आरसी से लेकर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी की थी। परिवहन विभाग के कहने पर हमने बसों से करियर हटा दिए। सेफ्टी वॉल्स लगा दिए, हैमर लगा दिए। इसके बावजूद परिवहन विभाग नहीं मान रहा है। अब सरकार हमारी बात माने तो हम गाड़ियां चलाने को तैयार हैं। क्योंकि हमने गाड़ियां चलाने के लिए ही बनाई हैं। हड़ताल का पहले ऐलान करने से ज्यादा रिफंड नहीं देना पड़ा
हड़ताल से कितना रिफंड करना पड़ा, इस सवाल पर राजेंद्र परिहार ने बताया- हमने तीन दिन पहले ऐलान कर दिया था। इसलिए ज्यादा रिफंड नहीं करना पड़ा। वर्तमान में यहां 38 ट्रैवल एजेंसियों के ऑफिस हैं। इनके करीब 150 ब्रांच ऑफिस हैं। यहां से हर प्रमुख शहर खासतौर पर दक्षिण भारत के लिए बसें उपलब्ध हैं।

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