नए कानून और बदलते जमाने के साथ अब वकालत के पेशे में भी युवा वर्ग का रुझान बढ़ने लगा है। शहर में इसके चलते एलएलबी करने वाले छात्र छात्राओं की संख्या बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में वकालत के पेशे में आने वाले नए वकीलों को पुराने मामलों में कोर्ट के निर्णय को ढूंढने में हो रही परेशानी को देखते हुए शहर के अक्षय चक्रवर्ती और उनकी टीम ने नई पहल की है। अक्षय की ओर से चेक बाउंस और उससे जुड़े मामलों में कोर्ट की ओर से दिए गए निर्णयों, और दिशानिर्देश को हिंदी और अंग्रेजी भाषा में ड्राफ्टिंग कर जर्नल प्रकाशित कर रहे हैं। सरल और सहज भाषा में इसे ड्राफ्ट किया गया है। इसके जरिए कम समय में स्टडी कर वकील देश भर में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की ओर से पूर्व में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्णयों का हवाला देते हुए फैसला भी करवा पा रहे हैं। इस मौके उन्होंने दैनिक भास्कर के साथ खास बातचीत की। अक्षय चक्रवर्ती ने बताया कि साल 2002 में NI एक्ट में बदलाव के बाद इसे क्रिमिनल एक्ट के समान माना गया । इसके कोर्ट भी अलग खोले गए। इसके चलते चैक अनादरण से जुड़े मामलों के जल्दी निपटान पर काम किया जा रहा है। ऐसे में साल 2006 से NI एक्ट पर जर्नल प्रकाशित कर हैं। वर्तमान में NI एक्ट के अंदर होने वाले बदलाव और सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट की ओर से दिए जाने वाले निर्णयों, दिशा निर्देश की जानकारी वकीलों को हो इसके लिए हर माह नेगोशिएबल इंट्रूमेंट्स जजमेंट जर्नल में प्रकाशित किया जाता है। इसका उद्देश्य NI एक्ट के मामलों में पैरवी कर रहे वकीलों को सहूलियत रहे। इसके माध्यम से अब एडवोकेट नए मामलों में पुराने निर्णयों के आधार पर फैसला करवा पाते हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के मुख्य निर्णयों को वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाता है। जिससे इस तरह के मामलों में एडवोकेट को मदद मिल सकें। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट और देशभर के सभी राज्यों की हाईकोर्ट के निर्णयों का अवलोकन किया जाता है। इसके बाद इसे आसान भाषा में नोट्स बनाकर हिंदी और अंग्रेजी भाषा में व्याख्या कर वेबसाइट में अपलोड किया जाता है। जिससे कि पैरवी कर रहे वकीलों को समझने में आसानी रहे। उन्होंने बताया कि उसके लिए उन्होंने nijudgments.com नाम से वेबसाइट भी बनाई है। इसके जरिए नए वकीलों को चैक बाउंस जैसे मामलों की जानकारी दी जाती है।


