विधानसभा में बुधवार को डिस्टर्ब एरिया बिल पेश कर दिया गया है। यह बिल इसी सत्र में विधानसभा में बहस के बाद पारित करवाने की तैयारी है। ‘दी राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोविजन फोर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेन्ट्स फ्रॉम एविक्शन फ्रॉम प्रिमाइसेज इन डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल, 2026’ में सरकार दंगा प्रभावित इलाकों को डिस्टर्ब एरिया घोषित कर सकेगी। डिस्टर्ब एरिया में कलेक्टर-एडीएम की मंजूरी के बिना कोई भी प्रॉपर्टी की खरीद और बेचान नहीं हो सकेगा, न रजिस्ट्री हो सकेगी। 5 साल तक की सजा का प्रावधान बिल के प्रावधानों के मुताबिक किसी समुदाय विशेष की जनसंख्या बढ़ने और जानबूझकर डेमोग्राफी बदलने की कोशिश होने पर भी उस एरिया को डिस्टर्ब एरिया घोषित कर प्रॉपर्टी की खरीद बेचान पर रोक लगा सकेगी। इसके प्रावधानों के उल्लंघन पर तीन से पांच साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। दंगा प्रभावित इलाके डिस्टर्ब एरिया घोषित होंगे जिन इलाकों में सांप्रदायिक तनाव या दंगे होते हैं, उन्हें सरकार डिस्टर्ब एरिया घोषित कर सकेगी। बिल के प्रावधानों के अनुसार सांप्रदायिक तनाव, दंगा, बलवा वाले इलाके को डिस्टर्ब एरिया घोषित किया जाएगा। डिस्टर्ब एरिया के लिए मॉनिटरिंग कमेटी बनाने का भी प्रावधान है। यह कमेटी इलाके के माहौल की मॉनिटरिंग करेगी। बिल के प्रावधानों में दंगा प्रभावित इलाके में किराएदारों के अधिकारों को भी सुरक्षित रखा जाएगा। दंगे में किराएदार का मकान जलने-टूटने पर किराएदार को दूसरी जगह दिलानी होगी। यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने सदन में ही थूका इससे पहले शून्यकाल में सदन में बात कर रहे विधायक को स्पीकर ने फटकार लगा दी। विधायक को पहले तो स्पीकर ने धीरे से टोका, लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया। इस पर स्पीकर ने फटकार लगाई। वहीं सामाजिक संस्थाओं के जमीन आवंटन में देरी को लेकर शून्यकाल में कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट किया था। राजस्व मंत्री ने जवाब के दौरान पिछली सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस के वॉकआउट पर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि कांग्रेसी केवल नौटंकी करते हैं। इससे पहले प्रश्नकाल में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने सदन में ही थूक दिया। जूली ने भी जताई आपत्ति, मंत्री गए समझाने सदन की कार्यवाही के दौरान बात करने पर लाडपुरा विधायक कल्पना देवी को स्पीकर ने डांट दिया। संसदीय कार्यमंत्री विधायक के पास जाकर समझाने लगे तो नेता प्रतिपक्ष ने फिर बातचीत को लेकर आपत्ति जताई। इस पर स्पीकर ने कहा कि वे तो उन्हें समझाने गए हैं। इससे पहले राजस्व मंत्री के जमीन आवंटन को लेकर जवाब के मामले में कांग्रेस सदस्यों ने वॉकआउट किया। कांग्रेस विधायक गीता बरवड़ के आसोप उप तहसील को तहसील में क्रमोन्न्त करने के मूल सवाल के जवाब में राजस्व मंत्री हेमतं मीणा ने कहा कि नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन और पुनर्गठन के लिए ललित के पवार कमेटी बनी हुई है। कमेटी की रिपोर्ट के बाद नई तहसीलों पर फैसला होगा। इस पर हंगामा भी हुआ। जिले ले जाओ, तहसील ले जाओ नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा- नए जिले को खालेंगे क्या? इस पर राजस्व मंत्री ने कहा- पिछली सरकार ने राजीतिक लाभ के लिए नए जिले बनाए थे। जिले ले जाओ, तहसील ले जाओ और कोई प्रक्रिया का पालन नहीं किया। हमने लोगों की भलाई के लिए जिले तहसील बनाए। आपने राजनीति करने के लिए बनाए। जूली ने पलटवार करते हुए कहा कि आप बना नहीं सकते। आप तो तोड़ सकते हो। इसी बीच स्पीकर ने अगला सवाल पुकार लिया तो हंगामा शांत हुआ। उधर, विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान बुधवार को पूरक सवाल पूछने की जगह लंबा ब्योरा देने पर निर्दलीय विधायक जीवाराम चौधरी को टोकते हुए स्पीकर वासुदेव देवनानी ने कहा- आप भाषण मत दीजिए। सवाल पूछिए। विधानसभा में बहस की PHOTOS… पल-पल के अपडेट के लिए ब्लॉग देखिए…


