राजस्थान कार्यरत हजारों की संख्या में इन सर्विस डॉक्टर्स (सेवारत चिकित्सक) के लिए सरकार ने एक अहम निर्णय किया है। इस निर्णय के तहत पोस्ट ग्रेजुएट इन मेडिकल (PG), सीनियर रेजीडेंसी (SR) या कोई दूसरी हायर एज्युकेशन कोर्स पूरा होने के बाद इन डॉक्टर्स को एपीओ रहने के दौरान सैलेरी या दूसरे भत्ते नहीं रोके जाएंगे। साथ ही ऐसे डॉक्टर्स का एपीओ का कार्यकाल भी नियमित अलग से नियमित नहीं करवाना पड़ेगा। दरअसल प्रदेश में कई इन सर्विस डॉक्टर्स जिन्हें मेडिकल ऑफिसर (MO) या अन्य पदों पर नियुक्ति मिलती है। उनमें से अधिकांश डॉक्टर्स PG, SR, DM या DNB समेत अन्य कोर्स करने के लिए सरकार छुट्टी देती है। जब इन डॉक्टर्स का कोर्स पूरा हो जाता है तो उन्हें वापस से मेडिकल डिपार्टमेंट में ज्वाइनिंग देनी होती है ताकि सरकार उन्हें पोस्टिंग (पीएचसी, सीएचसी, जिला हॉस्पिटल या अन्य कहीं भी) दे सके। लेकिन अक्सर ऐसे कोर्स पूरा होने के बाद पोस्टिंग नहीं मिलने से APO रहते है। पिछले कई सालों से ऐसा देखा गया है कि कोर्स पूरा होने के बाद सैंकड़ों की संख्या में डॉक्टर्स 2 से 3 या उससे भी ज्यादा लम्बे समय तक पोस्टिंग के इंतजार में APO रहते है। इस दौरान न तो उनको पूरा वेतन मिलता और न ही अन्य दूसरे भत्ते। यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. भरत पारीक कहा कि यह निर्णय डॉक्टरों की जीत नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और सकारात्मक शासन का उदाहरण है। इससे युवा डॉक्टरों का मनोबल बढ़ेगा। अब मिलेगा पूरा वेतन, नहीं करवाना पड़ेगा नियमितिकरण सरकार ने इस मुद्दे पर डॉक्टरों से चर्चा के बाद नया नियम बनाया है। इस नए नियम के तहत अब APO रहने के दौरान डॉक्टर्स को पूरी सैलेरी मिलेगी। साथ ही ये भी कोशिश रहेगी कि कोर्स पूरा होने के एक माह के अंदर डॉक्टर को पोस्टिंग दे दी जाए। इसके अलावा पोस्टिंग देने के बाद जब डॉक्टर वहां ज्वाइनिंग देगा तो उसे APO अवधि को ऑटोमैटिक नियमित माना जाएगा। क्योंकि अभी तक इस APO अवधि का नियमितिकरण करवाने क लिए हर डॉक्टर की अलग से फाइल चलती थी, कई महीने या सालभर का समय लग जाता था, जिससे डॉक्टरों को अनावश्यक निदेशालय और सचिवालय के चक्कर काटने पड़ते थे।


