हेमंत | जालंधर मौसम में तपिश बढ़ते ही मंदिरों में भगवान का परिधान बदल गया है। हालांकि सुबह-शाम हल्की ठंडक है, लेकिन मंदिरों में भगवान की प्रतिमा के वस्त्र बदलने से लेकर उनका भोग में भी बदलाव किया गया है। सुबह पंचामृत से स्नान और कपड़ों के साथ शृंगार करके ठंडा दूध, दही, लस्सी, फलों के साथ हलवे का भोग लगाया जा रहा है। कई मंदिरों में भगवान के शयन समय में भी बदलाव किया गया है। एसी, पंखे और मिट्टी के बर्तन रखकर उन्हें ठंडक दी जा रही है। शिव शक्ति मां बगलामुखी धाम के अध्यक्ष विजय शास्त्री ने बताया कि मंदिर में विराजमान देवी-देवताओं को गर्मी न लगे, इसलिए मौसमी फूलों का शृंगार किया जा रहा है। अभिषेक के बाद सूती वस्त्र पहनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी में मंदिर के पट जल्दी खुल जाते हैं और देर तक बंद किए जाते हैं। भगवान को ठंडे पकवानों का भोग लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि देवी-देवताओं को ठंडक के लिए मिट्टी से बने बर्तनों में नींबू पानी, शरबत का भोग लगाया जाता है। श्री देवी तालाब मंदिर के महासचिव राजेश विज ने बताया कि मौसम में बदलाव आते ही मंदिर में भी बहुत से बदलाव किए गए हैं। गर्मियों में सुबह मंदिर के कपाट खोलने से लेकर देवी-देवताओं की आरती तक का समय भी बदल गया। माता रानी को गर्मी में गहरे रंग के बजाय हल्के रंग के वस्त्र पहनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोले जाते हैं और 5 बजे भव्य आरती शुरू हो रही है। उन्होंने बताया कि माता रानी को पंचामृत स्नान के बाद तिलक लगाकर दूध का भोग लगाया जाता है। दोपहर 12 बजे खीर-पूरी और सब्जी का भोग लगाया जाता है। प्राचीन मंदिर बाबा यशरथ राय जी श्री बालाजी धाम थापरां मोहल्ला के मुख्य सेवादार गौरव थापर ने बताया कि जब भी गर्मी का सीजन शुरू होता है तो श्रद्धालु सूती वस्त्र तैयार करके भगवान की प्रतिमा को पहनाने के लिए लाते हैं। यह भक्तों का प्रभु के प्रति अथाह प्रेम और आस्था है। उन्होंने बताया कि सर्दियों में सुबह 6 बजे मंदिर के कपाट खोले जाते थे और 6:30 बजे मंगला आरती की जाती थी। जैसे मौसम में बदलाव आया तो अब सुबह 5 बजे मंदिर के कपाट खोले जाते हैं और मंगल आरती 6 बजे होती है। संध्या आरती शाम 6 बजे होगी। देवी देवताओं के लिए सर्दियों में हीटर और गर्मियों के मौसम में एसी का प्रबंध किया जाता है।


