भास्कर न्यूज | जालंधर डेरा निर्मल तख्त में चल रहे मासिक 225 श्री संपट पाठों के भोग बुधवार को डाले गए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संगत के अलावा पाठ करवाने वाले परिवार भी उपस्थित थे। इन परिवारों ने गद्दीनशीन बाबा अमनप्रीत सिंह से आशीर्वाद भी लिया। बाबा अमनप्रीत सिंह ने कहा कि जीवन में जब भी अवसर मिले, दुआएं भी कमानी चाहिए। दुआ ही वह सहारा है, जो टूटते हौसलों को भी संभाल लेती है। जिंदगी के किसी न किसी मोड़ पर सच्ची नीयत से मिली दुआएं ही रास्ता बनकर सामने आ जाती हैं। इसलिए इंसानियत का कभी सौदा न करें। दिल साफ और नीयत नेक रखें क्योंकि ईश्वर के दर सच्चे कर्म ही तराजू हैं, जिनके माध्यम से ही मनुष्य का बेड़ा पार होना है। उन्होंने कहा कि दुख और सुख दोनों जिंदगी का हिस्सा हैं, इसलिए दुख के समय चिंता न करें और सुख के समय अहंकार। दोनों समय वाहेगुरु के समक्ष हिम्मत और हौसला बख्शने की अरदास करें, आपकी हमेशा चढ़दी कला रहेगी। डेरे के सेवादार जोबनप्रीत सिंह ने बताया कि श्री संपट पाठों की लड़ी सारा साल डेरे में चलती रहती है। डेरे की संगत अपनी मनोकामनाएं पूरी होने और गृहस्थ जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अरदास और विनती के लिए पाठ करवाती है। श्री संपट पाठों के भोग के उपरांत अगली लड़ी के पाठ साथ ही आरंभ कर दिए गए। इस अवसर पर संगत में तरनजीत सिंह बावा, सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी राजीव कुमार, रजिंदर सिंह रीहल, अवतार सिंह, गुरमुख सिंह, बीबी जसविंदर कौर, बीबी मनजीत कौर, रमनदीप सिंह आदि भी मौजूद रहे।


