बिलासपुर एयरपोर्ट पर हवाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर जनहित याचिकाओं पर बुधवार को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल ने विमानन विभाग के संचालक को विस्तृत शपथ पत्र देने के निर्देश दिए हैं। जिसमें यह बताने को कहा है कि एयरपोर्ट के विकास के लिए आगे क्या योजना है और नाइट लैंडिंग की सुविधा शुरू होने के बाद उसे संभालने के लिए पर्याप्त स्टाफ मौजूद है या नहीं? दरअसल, बिलासपुर में बिलासा दाई केंवट एयरपोर्ट में फ्लाइट शुरू कर दी गई है। लेकिन, एयरपोर्ट पर सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई है। वहीं, एयरपोर्ट का विस्तार नहीं होने के कारण यहां फ्लाइट की संख्या सीमित है। एयरपोर्ट में सुविधाओं के विस्तार को लेकर हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की गई है, जिस पर हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई हो रही है। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और फटकार के बाद ही एयरपोर्ट पर नाइट लैंडिंग सहित 3सी कैटेगरी लाइसेंस सहित सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में काम हो रहा है। हाईकोर्ट ने विमानन संचालक से शपथपत्र के साथ मांगा जवाब
इस केस की सुनवाई के दौरान एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की तरफ से वकील ने कोर्ट को बताया कि नाइट लैंडिंग के संबंध में नोटाम यानी नोटिस ऑफ एयरमैन जारी कर दिया गया है। इसकी तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले 30 दिनों में बिलासपुर एयरपोर्ट रात में विमानों की लैंडिंग के लिए पूरी तरह खुल जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता रमाकांत मिश्रा और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने आश्वस्त किया कि राज्य और केंद्र सरकार एयरपोर्ट विकास के लिए तत्पर हैं। हाईकोर्ट ने भी माना कि एयरपोर्ट पर अब काम दिख रहा है, इसलिए उन्हें और समय दिया जाना उचित है। अब मामले की अगली सुनवाई मार्च में होगी। विमानन संचालक को इन बिंदुओं पर देना होगा जवाब
हाईकोर्ट ने विमानन विभाग के संचालक को तीन बिंदुओं पर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति बतानी होगी, जिसमें एयरपोर्ट पर वर्तमान में आधारभूत संरचना कैसी है और भविष्य में कौन-कौन से नए काम किए जाने हैं?नाइट लैंडिंग सुविधा मिलने के बाद क्या इसे संचालित करने के लिए तकनीकी और सपोर्ट स्टाफ की संख्या पर्याप्त है। गर्मियों के शेड्यूल में बिलासपुर से उड़ानों की संख्या क्या होगी और किन शहरों के लिए परिचालन होगा? वकील बोले- स्टाफ की कमी से नहीं मिलेगा लाभ
याचिकाकर्ताओं की ओर से वकीलों ने स्टाफ की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि पर्याप्त स्टाफ नहीं होगा, तो नाइट लैंडिंग की सुविधा का लाभ पूरे समय नहीं मिल पाएगा। वहीं, कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने विकास के लिए फंड तो आवंटित किया है, लेकिन उसे किन कामों पर खर्च किया जाना है, इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है।


