कठपुतली, कच्ची घोड़ी नाटक से बताया वन संपदा का महत्व:अलसीगढ़ में महुआ एवं सीताफल की उपज से ग्रामीणों की आय बढ़ाने को लेकर किया जागरूक

पंच गौरव योजना के तहत अलसीगढ़ में जागरूकता कार्यक्रम, महुआ रोपण व सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित पंच गौरव योजना के अंतर्गत शहर के समीप अलसीगढ़ में वन विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीणों, स्थानीय निवासियों, ग्राम्य वन सुरक्षा एवं प्रबंधन समिति के सदस्यों तथा विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर वन विभाग की टीम ने वनस्पति प्रजाति महुआ एवं जिले की उपज सीताफल के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि महुआ एक बहुउपयोगी वृक्ष है, जिसके फूल, फल, बीज, पत्ते, छाल और लकड़ी सभी का उपयोग किया जाता है। महुआ के फूलों से लड्डू, पेड़ा और चटनी जैसे स्थानीय व्यंजन तैयार किए जाते हैं। दक्षिणी राजस्थान में महुआ का विशेष सामाजिक एवं आर्थिक महत्व है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आय बढ़ाने को लेकर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम के दौरान कठपुतली और कच्ची घोड़ी नाटक के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और वन संपदा के महत्व का संदेश दिया गया। स्कूली छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। साथ ही महुआ के पौधों का रोपण एवं पौध वितरण भी किया गया। उप वन संरक्षक मुकेश सैनी ने बताया कि पंच गौरव कार्यक्रम के अंतर्गत पांच प्रमुख घटकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इनमें एक जिला एक उत्पाद के तहत मार्बल एवं ग्रेनाइट, एक जिला एक उपज के रूप में सीताफल, एक जिला एक वनस्पति प्रजाति के रूप में महुआ, एक जिला एक खेल के तहत तैराकी तथा एक जिला एक पर्यटक स्थल के रूप में फतहसागर झील एवं पिछोला झील के समग्र विकास और संरक्षण की अवधारणा को केंद्र में रखकर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ उनके आर्थिक एवं सामाजिक महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है। इसमें वन विभाग के अन्य अधिकारीगण और स्थानीय स्टाफ भी शामिल हुआ।

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