बांसवाड़ा में प्रदेशव्यापी आह्वान पर निजी बस संचालकों की हड़ताल से यात्री परेशान हो गए। जिले में करीब 280 से 300 निजी बसों के चक्के जाम रहने से परिवहन व्यवस्था प्रभावित रही। ग्रामीण क्षेत्रों से आए कई यात्रियों को हड़ताल की जानकारी नहीं थी और उन्हें बस स्टैंड से लौटना पड़ा। वहीं, कुछ यात्री बोले- बस संचालकों की हड़ताल से हमे बस स्टैंड पर रात गुजारनी पड़ी। रोडवेज बस स्टैंड पर बढ़ी भीड़ निजी बसें बंद होने का सीधा असर रोडवेज बसों पर पड़ा। बसों की संख्या कम होने से यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। जो बसें चल रही थीं, उनमें क्षमता से अधिक भीड़ रही। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। देर रात तक यात्री बस स्टैंड पर बैठे रहे। अध्यक्ष ने बताई हड़ताल की वजह निजी बस एसोसिएशन के अध्यक्ष मुजफ्फर अली ने बताया कि परिवहन विभाग (डीटीओ और आरटीओ) द्वारा बार-बार चालान काटे जा रहे हैं और बसों को सीज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से राज्य सरकार से समस्याओं के समाधान की मांग की जा रही है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि बांसवाड़ा जैसे शहर में न रेल सुविधा है और न हवाई सेवा। ऐसे में यात्री पूरी तरह बसों पर निर्भर हैं। रोडवेज बसों की संख्या कम होने से यात्रियों और संचालकों दोनों को परेशानी हो रही है। रातभर बस स्टैंड पर इंतजार हड़ताल का असर लंबी दूरी के यात्रियों पर ज्यादा पड़ा। रोडवेज बस स्टैंड पर रात में बड़ी संख्या में यात्री बच्चों और सामान के साथ इंतजार करते दिखे। बाजना से दूदू जाने वाले करीब 18 यात्री शाम 5 बजे से बस का इंतजार कर रहे थे। उन्हें रात 11:30 बजे बस मिलने का आश्वासन दिया गया। हड़ताल की पूर्व सूचना नहीं होने से दूर-दराज के गांवों से आए लोग शहर में भटकते नजर आए।


