करौली के राजकीय पीजी कॉलेज में जिला स्तरीय युवा संसद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में 60 से अधिक युवाओं ने ‘आपातकाल के 50 साल: भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सबक’ विषय पर गंभीर विमर्श किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र के ऐतिहासिक अनुभवों से सीख लेना था। इस जिला स्तरीय आयोजन के लिए कुल 74 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 60 से अधिक युवाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। युवाओं ने मंच से संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों पर अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल के राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम में भारत में लगाए गए आपातकाल के ऐतिहासिक संदर्भ भी रखे गए। वक्ताओं ने बताया कि देश में अब तक तीन बार राष्ट्रीय आपातकाल लगाया गया है। ये आपातकाल 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान, 1971 में भारत-पाक युद्ध के समय और 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर लगाए गए थे। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तीन प्रतिभागियों का चयन किया गया। इन चयनित युवाओं को राजस्थान विधानसभा में अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम का आयोजन माय भारत और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। आयोजकों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करना और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।


