नेशनल हाईवे पर हैंडपंप हटाने को लेकर विवाद:GPM में ग्रामीण बोले- पहले पानी का अच्छा स्रोत दो, फिर हटाओ

छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में नेशनल हाईवे के बीच स्थित हैंडपंप को हटाने से ग्रामीणों ने ठेका कंपनी को रोक दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि नए बोरवेल में पानी का स्रोत कम है, इसलिए जब तक पानी का अच्छा स्रोत उपलब्ध नहीं कराया जाता, वे हैंडपंप नहीं हटाने देंगे। यह मामला जबलपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे- 45 के निर्माण से जुड़ा है। राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों के निर्देश पर ठेका कंपनी ने ग्राम जोगीसार के मुख्य चौराहे के पास सड़क को सीधा और चौड़ा किया था। इस प्रक्रिया में कुछ ग्रामीणों के मकान भी तोड़े गए। सड़क चौड़ीकरण के कारण सड़क किनारे स्थित एक हैंडपंप अब हाईवे के बीच में आ गया है। यह हैंडपंप ग्रामीणों के लिए पेयजल का मुख्य स्रोत है। ठेका कंपनी ने सड़क किनारे एक नया बोर खनन कर हैंडपंप स्थापित किया था। इसके बाद वे हाईवे के बीच स्थित पुराने हैंडपंप को हटाने लगे। नए हैंडपंप में कम पानी, ग्रामीण नाराज हालांकि, ग्रामीणों ने जब नए हैंडपंप में पानी के स्रोत की जांच की, तो उन्हें पानी कम मिला, जिससे वे असंतुष्ट हो गए। ग्रामीणों ने पुराने हैंडपंप को हटाने से रोक दिया और मांग की है कि जब तक पानी के अच्छे स्रोत वाला नया हैंडपंप स्थापित नहीं किया जाता, तब तक वे इसे नहीं हटाने देंगे। कंपनी का आश्वासन, फिर होगा बोर खनन ठेका कंपनी श्याम इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के कमलेश पाटिल ने कहा कि ग्रामीणों को पेयजल सुविधा देने के लिए नया बोर खनन कर हैंडपंप लगाया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि ग्रामीण नए हैंडपंप में पानी के स्रोत से असंतुष्ट हैं, तो जल्द ही एक और नया बोर खनन कर हैंडपंप स्थापित किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के मापदंडों के अनुसार सड़क को सीधा और चौड़ा करने के कारण ही यह हैंडपंप सड़क के बीच में आ गया है, जिससे उनका काम भी प्रभावित हो रहा है।

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