भारतीय मजदूर संघ का देशव्यापी प्रदर्शन:बलरामपुर में सौंपा ज्ञापन, केंद्र सरकार से की कई मांगें

भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने बुधवार को अखिल भारतीय आह्वान पर बलरामपुर-रामानुजगंज (छत्तीसगढ़) जिला मुख्यालय में एक विशाल प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद, केंद्र सरकार के नाम एक ज्ञापन जिलाधीश, बलरामपुर-रामानुजगंज के माध्यम से भेजा गया। यह ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया को संबोधित है। ज्ञापन में बताया गया है कि संघ का 21वां अखिल भारतीय त्रिवार्षिक अधिवेशन 6, 7 और 8 फरवरी 2026 को पुरी, ओडिशा में आयोजित हुआ था। इस अधिवेशन में देशभर से आए प्रतिनिधियों ने श्रमिकों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की और सर्वसम्मति से कई प्रस्ताव पारित किए। इन्हीं प्रस्तावों के आधार पर 25 फरवरी 2026 को देशव्यापी धरना-प्रदर्शन करते हुए यह ज्ञापन सौंपा गया। संघ ने श्रम कानूनों के पालन की मांगें रखी संघ की प्रमुख मांगों में सभी क्षेत्रों में श्रम कानूनों को बिना किसी छूट के सख्ती से लागू करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020 और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड 2020 से संबंधित श्रमिकों की चिंताओं का समाधान करने की मांग की गई है। संघ ने त्रिपक्षीय तंत्र को सुदृढ़ करने और इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस की शीघ्र बैठक बुलाने पर भी जोर दिया है। संघ ने न्यूनतम पेंशन बढ़ाने और श्रमिक कल्याण सुधारों की प्रमुख मांगें उठाईं ज्ञापन में ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम पेंशन को 1000 रुपए से बढ़ाकर 7500 रुपए प्रतिमाह महंगाई राहत सहित करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। साथ ही, ईपीएफ की वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये और ईएसआईसी की सीमा 21 हजार से बढ़ाकर 42 हजार रुपए करने की भी मांग की गई है। अन्य मांगों में बोनस भुगतान अधिनियम 1965 के तहत पात्रता सीमा में वृद्धि करना और ठेका व स्कीम श्रमिकों को स्थायी करने का प्रावधान शामिल है। इस प्रदर्शन में प्रदेश अध्यक्ष शोभा सिंह देव मुख्य वक्ता रहीं। विभाग प्रमुख प्रत्यूष केसरी, अर्जुन यादव, लक्ष्मण यादव, मीरा जैसवाल सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे। वक्ताओं ने श्रमिक हितों की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। संघ के पदाधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार श्रमिकों की मांगों पर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लेगी और आवश्यक कार्रवाई करेगी।

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