प्रदेशभर में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच राजधानी जयपुर में इसके समर्थन में आज भीम सेना के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन शहीद स्मारक पर हुआ। एससी, एसटी और ओबीसी समाज के अधिकारों और यूसीसी के समर्थन में कार्यकर्ताओं ने शाम को मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें शहीद स्मारक पर ही रोक लिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई। कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़कर संगठन का झंडा लहराने लगे, जिन्हें पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद नीचे उतारा। मौके पर जमकर नारेबाजी भी हुई। यूसीसी के समर्थन में शहीद स्मारक पर धरना इससे पहले दोपहर 12 बजे भामाशाह चेतराम बैरवा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोगों ने शहीद स्मारक पर धरना दिया। चेतराम बैरवा ने कहा कि यूसीसी के समर्थन में यह महा-आंदोलन किया गया है, क्योंकि मौजूदा सामाजिक व्यवस्था में एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं को लंबे समय से भेदभाव और अन्याय का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनुवादी सोच से जुड़े कुछ लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, जबकि यह कानून वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न समाजों के लोग इस आंदोलन में शामिल हुए हैं, जिससे समर्थन लगातार बढ़ रहा है। सरकार और कोर्ट से उम्मीद जताई चेतराम बैरवा ने कहा कि कोर्ट के निर्देशों के बाद सरकार यह बिल लेकर आई थी, लेकिन विरोध के चलते इस पर रोक लग गई। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस पर सकारात्मक फैसला करेंगे और यूसीसी को लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय की समस्याओं को समझना चाहिए। जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, उन्हें एक बार इन वर्गों की स्थिति को महसूस करना चाहिए। समानता बढ़ाने की अपील भीम सेना नेताओं ने कहा कि यूसीसी लागू होने से समाज में समानता बढ़ेगी। उन्होंने स्वर्ण जाति समाज से भी बड़े दिल से सोचने और व्यवस्था में सुधार के लिए सहयोग करने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने लगाई है रोक गौरतलब है कि यूसीसी लागू होने से पहले प्रदेशभर में बड़े स्तर पर विरोध हुआ था। इसके बाद गुरुवार, 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि जब तक अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक वर्ष 2012 के नियम लागू रहेंगे। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि प्रथम दृष्टया नए नियमों में कुछ अस्पष्टताएं हैं और इनके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही कुछ बिंदुओं पर विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई गई है।


