हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में नए साल में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का उद्घाटन नहीं होगा। इसके बजाय, समृद्धि भवन का शुभारंभ किया जाएगा। वर्तमान में फाइनल फिनिशिंग का कार्य चल रहा है। धर्मशाला स्मार्ट सिटी के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट आईसीसीसी (इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर) का नहीं, बल्कि समृद्धि भवन की स्थापना का कार्य लगभग पूरा हो गया है। नए साल में धर्मशाला के शीतकालीन प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इसका उद्घाटन कर सकते हैं। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की स्थापना पहले ही लाखों रुपए खर्च कर चरान खड्ड के नजदीक इंटीग्रेटेड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईएचएसडीपी) के तहत निर्मित कम्युनिटी सेंटर में की गई थी। इस पर पूर्व मंत्री एवं धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने सवाल उठाया है कि नगर निगम के रूटीन कार्यों पर स्मार्ट सिटी का फंड खर्च किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी का पैसा जिस योजना के लिए आया था, उसका मिस यूज हुआ है। धर्मशाला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत धर्मशाला शहर में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 21 जनवरी 2019 को 24.44 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल केंद्र भवन का शिलान्यास किया था, लेकिन अब यह समृद्धि भवन, नगर निगम धर्मशाला बन गया है। हिमुडा के एक्सईएन अनिल सूद ने बताया कि 24.47 करोड़ रुपए की लागत से समृद्धि भवन का कार्य पूरा हो गया है। ऑफिस फर्नीचर रखा जा रहा है और फाइनल फिनिशिंग का कार्य चल रहा है। शहर में लगाए जाएंगे सीसीटीवी कैमरें स्मार्ट सिटी की बीओडी की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 20वीं बैठक में शहर में सुरक्षा और निगरानी को बढ़ावा देने के लिए 24.47 करोड़ रुपए की एकीकृत कमांड नियंत्रण परियोजना को मंजूरी दी गई थी। इस परियोजना के तहत मैक्लोडगंज, फरसेटगंज, डल चौक, पोस्ट ऑफिस, कोतवाली बाजार, कचहरी चौक और शिला चौक सहित प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही, शहर में फाइबर नेटवर्क की स्थापना और यातायात नियंत्रण के लिए कैमरों का उपयोग किया जाना प्रस्तावित था। लेकिन बिना किसी एप्रूवल के इसमें भी बदलाव कर दिया गया। सिटी कन्वेंशन सेंटर के निर्माण को मिली थी मंजूरी कचहरी अड्डा में 6.68 करोड़ रुपए की लागत से सिटी कन्वेंशन सेंटर के निर्माण को मंजूरी मिली थी। इस भवन में मीडिया बॉक्स और मीडिया रेस्ट हाउस का निर्माण किया जाना प्रस्तावित था। हालांकि, इन योजनाओं के बजट को भी ट्रांसफर कर इनके मूल स्वरूप में बदलाव किया गया। स्थानीय लोग और स्वयं सेवी संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। पूर्व सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी कैप्टन जीएम पठानिया ने बताया कि वे इस संबंध में शीघ्र ही कोर्ट में जनहित याचिका दायर करने के लिए साक्ष्य जुटा रहे हैं।


