जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी के संचालक पदमचंद जैन के बेटे पीयूष जैन, गणपति ट्यूबवेल कंपनी के मालिक महेश मित्तल उनके बेटे हेमंत मित्तल सहित 5 आरोपियों को आज हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। सभी आरोपियों को एसीबी ने दिसम्बर 2025 में गिरफ्तार किया था। आरोपियों की ओर से अदालत में कहा गया कि मामले में एसीबी ने साल 2023 में एफआईआर दर्ज की थी। वहीं, उस समय सभी आरोपियों के खिलाफ जांच को पेडिंग रखा था। लेकिन करीब दो साल बाद एसाबी ने दिसम्बर-2025 में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जबकि एसीबी के पास कोई नया एविडेंस नहीं है। सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति नहीं अधिवक्ता ब्रह्मानंद सांदू ने अदालत को बताया कि इस मामले में जिन सरकारी अधिकरियों पर रिश्वत लेने का आरोप है। उनकी गिरफ्तारी के बाद से लेकर आज तक सरकार ने उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति जारी नहीं की है। आरोपियों के खिलाफ भी चालान पेश हो चुका हैं। जिन धाराओं में आरोपियों के खिलाफ चालान पेश हुआ है, उसमें अधिकतम 7 साल की सजा का प्रावधान है। ट्रायल में लंबा समय लगेगा, ऐसे में आरोपियों को जमानत दी जाए। उन्होने बताया कि पीयूष जैन के खिलाफ कोई स्पष्ट आरोप भी नहीं है। एसीबी का कहना है कि पदमचंद जैन और पीयूष जैन की बातचीत में भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है। लेकिन पूरी बातचीत में पैसों के लेन-देन की कोई बात नहीं है, ना ही पीयूष जैन से कोई रिकवरी हुई हैं। मुख्य आरोपियों को मिल चुकी है जमानत
अधिवक्ता सुधीर जैन ने बताया कि मामले में महेश मित्तल और हेमंत मित्तल को फंसाया गया हैं। एसीबी ने पदमचंद जैन की कार से संदिग्ध 2.20 लाख की राशि बरामद की थी। प्रकरण में पदमचंद जैन, मायालाल सैनी, प्रदीप कुमार, राकेश चौहान और मलकेत सिंह मुख्य आरोपी हैं। जिन पर रिश्वत की मांग करना और रिश्वत की राशि प्राप्त करने का आरोप हैं। इन सभी मुख्य आरोपियों को इस मामले में 8 नवंबर 2023 को जमानत मिल चुकी हैं।


