डीपफेक…पीड़ित लड़कियां खुद को सच्चा साबित करने की लड़ रही हैं जंग

डीपफेक एआई टूल लड़कियों के लिए मानसिक प्रताड़ना का जरिया बन चुकी है। इस तकनीक से लड़कियों के चेहरों को अश्लील फोटो और वीडियो पर लगाकर उन्हें वायरल किया जा रहा है। इससे उनकी सामाजिक पहचान पर हमला हो रहा है और वे डर, शर्मिंदगी और तिरस्कार के बीच जीने को मजबूर हैं। भास्कर ने ऐसी तीन पीड़ित लड़कियों से बात की, जिनकी उम्र 25, 23 और 16 साल है। जो आज भी खुद को दुनिया के सामने सच्चा साबित करने की जंग लड़ रहे हैं। तीनों की कहानियां अलग हैं, लेकिन दर्द एक जैसा। शिक्षा प्रणाली में बदलाव जरूरी ऐसे अपराध रोकने के लिए शिक्षा प्रणाली में बदलाव जरूरी है। ‘गुड टच-बैड टच’ की तरह ही बच्चों को कम उम्र से ही तकनीक के सही और गलत इस्तेमाल के बारे में सिखाया जाने की जरूरत है। डीपफेक वीडियो रोकने के तरीके takeitdown.ncmec.org बच्चों के मामलों के लिए बनाया गया प्लेटफॉर्म है। शिकायत के बाद डीपफेक वीडियो या फोटो को इंटरनेट से हटाने की प्रक्रिया शुरू होती है। पुलिस से जानकारी साझा की जाती है कि वीडियो सबसे पहले कहां से अपलोड हुआ था। फर्जी वायरल वीडियो ने छीनी मेरी पहचान मेरा शादी का रिश्ता और भरोसा दोनों टूटे “मेरी उम्र 23 साल की है। अप्रैल 2025 में बेटी के एक ऑनलाइन दोस्त ने मुझसे कहा कि इंटरनेट पर मेरी शक्ल से मिलती-जुलती एक लड़की का वीडियो वायरल हो रहा है। उसने यह बात मजाकिया और फ्लर्ट करने वाले अंदाज में कही, इसलिए मैंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। कुछ दिन बाद मेरी चचेरी बहन ने भी मुझसे इसी तरह की बात की। उसी शाम किसी अनजान नंबर से मुझे एक वीडियो भेजी गई, जिसमें मेरे बारे में आपत्तिजनक बातें लिखी थीं। जब मैंने वीडियो देखी तो मैं हैरान रह गई। वीडियो में दिख रही लड़की मैं नहीं थी, लेकिन उसकी शक्ल मुझसे काफी मिलती-जुलती थी। यह बात उसी दिन मेरे परिवार तक पहुंच गई। मैंने सबको साफ-साफ बताया कि वीडियो में दिख रही लड़की मैं नहीं हूं। शुरुआत में घरवालों को मेरी बात पर यकीन नहीं हुआ। बाद में दोस्तों की मदद से जांच करवाई गई, तब पता चला कि वह वीडियो डीपफेक तकनीक से बनाई गई है। इसके बाद मेरे परिवार ने मेरी बात मान ली। हालांकि रिश्तेदारों को समझाना आसान नहीं था। तरह-तरह की बातें होने लगीं। आखिरकार मुझे सोशल मीडिया से दूर रहने की सलाह दी गई। इसी बीच यह मामला मेरे होने वाले ससुराल वालों तक भी पहुंच गया। उन्होंने लोगों की बातों को सच मानते हुए मेरा रिश्ता तोड़ दिया। मैंने अपने मंगेतर को भी वीडियो की सच्चाई बताई और डीपफेक होने के सबूत भी दिए, लेकिन उसने मेरी बात पर भरोसा नहीं किया। उसने उल्टा मुझे ही गलत ठहराया। इस पूरे घटनाक्रम ने मेरी जिंदगी को झकझोर कर रख दिया। एक फर्जी वीडियो ने मेरी पहचान, मेरी साख और मेरा रिश्ता सब कुछ छीन लिया।” -जैसा अमरपुरा निवासी लड़की ने बताया मेरी 14 साल की बेटी से रेप का प्रयास हुआ, उसकी सुरक्षा के लिए बदला घर “मेरी बेटी 14 साल की बेटी है। किसी ने मेरी बेटी की फोटो का इस्तेलामल करते हुए पहले एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया। उसके बाद विभिन्न लोगों से गंदी बातें करता था। इस बात का खुलासा तब हुआ जब 3 फरवरी की दोपहर मेरी बेटी के साथ इलाके के ही एक व्यक्ति ने छेड़छाड़ की। दरअसल, हमारे पड़ोस में एक ड्राइवर रहता है। वह अक्सर घर के पास आकर साइकिल पंक्चर की दुकान पर आकर बैठता था। पंक्चर वाला कभी-कभी घर पर पानी लेने के लिए आता था। वारदात की दोपहर मेरी पेट में दर्द थी। इसलिए बेटी को अकेला घर छोड़कर वे मेडिकल शॉप पर गई। पीछे से बेटी ने कमरे की कुंडी लगा ली। फिर पंक्चर वाले की दुकान पर ग्राहक ज्यादा होने की वजह से ड्राइवर घर पर पानी लेने के लिए और जोर-जोर से दरवाजा खटखटाने लगा। जब बेटी ने वहां से जाने को कहा तो आरोपी ने दरवाजे को झटके दिया जिससे वह खुल गया। बेटी को अकेला देखकर जबरदस्ती शुरू कर दी। जब बेटी ने रोते हुए शोर मचाना शुरू कर दिया तो आरोपी ने कहा कि फोन पर तो खुद चैट करती थी। अब क्या हुआ। फिर आरोपी धमकी देकर चला गया। फिर मैं घर पर आई तो बेटी ने रोते हुए सारी आपबीती बताई। इसके थाना डिवीजन- 6 की पुलिस को शिकायत देकर आरोपी वरिंदर कुमार उर्फ विक्की पुत्र हरभजन सिंह वासी प्रताप नगर पर पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज दर्ज करवया। पुलिस ने जांच में आया कि मेरी बेटी के फोटो का इस्तेमाल करते हुए कई फर्जी अकाउंट बनाकर कई लोगों के साथ गंदी बात हो रही है। मैंने इस बारे में थाना साइबर क्राइम की पुलिस को शिकायत दी। लेकिन अभी भी मेरी बेटी को काफी खतरा है। इसलिए अब हमने उस इलाके को छोड़कर किसी अन्य जगह पर जाकर रहने की योजना बनाई है।”- जैसा लड़की की मां ने बताया मेरी नौकरी जाने व सदमे ने मेरी मां की जिंदगी और मेरा भविष्य दोनों छीन लिया “फरवरी 2024 में मुझे रुपयों की जरूरत थी, इसलिए मैंने इंटरनेट पर सर्च किया कि कहां से जल्दी और कम ब्याज पर लोन मिल सकता है। इसी दौरान मैंने एक मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड कर ली। एप ने जो-जो परमिशन मांगी, मैंने सब दे दी। कागजी कार्रवाई के नाम पर मुझसे कुछ फोटो और दस्तावेज भी ले लिए गए। मुझे तब तक कुछ गलत नहीं लगा, लेकिन कुछ ही समय बाद मेरे ही बैंक अकाउंट से करीब 47 हजार रुपए निकल गए। मुझे कुछ समझ नहीं आया तो मैं बैंक गई। वहां पता चला कि मेरा फोन हैक कर लिया गया है। उसी समय एक विदेशी नंबर से मैसेज आया। लिखा था कि अगर मैंने पैसे नहीं दिए, तो मेरी डीपफेक से एडिट की गई अश्लील फोटो मेरे परिवार और रिश्तेदारों में फैला दी जाएगी। मैं डर गई और तुरंत थाना साइबर क्राइम में शिकायत दी। लेकिन पुलिस से मुझे खास मदद नहीं मिली। इसी बीच ब्लैकमेल करने वालों ने मेरी फोटो मेरी बहन के पास भेज दी। घर में सबकी नजरें मुझ पर टिक गईं। किसी को मुझ पर भरोसा नहीं हुआ। जब मैंने पुलिस शिकायत की कॉपी दिखाई, तब जाकर परिवार को यकीन हुआ। लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। फोटो मेरी बुआ-फूफा तक पहुंच चुकी थी। कॉलोनी और रिश्तेदारों में बातें फैलने लगीं। सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब वही फोटो मेरी कंपनी के एक सीनियर के पास पहुंच गई। मजबूरी में मुझे अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी। किसी तरह बाद में इस ब्लैकमेलिंग से तो छुटकारा मिला। आज हालात ये हैं किमेरा रिश्ता नहीं हो रहा। तनाव का असर मेरी मां पर सबसे ज्यादा पड़ा। वह लगातार बीमार रहने लगीं। सात महीने तक मां मानसिक यातना से गुजरती रहीं। आखिरकार मां इस सदमे को सह नहीं पाईं और उनकी मौत हो गई।-जैसा टिब्बा निवासी 25 वर्षीय युवती ने बताया
केस 3 केस 2 केस 1 पीड़ित बेटियों का दर्द… किसी बेटी से छिनी मां, एक बेटी का टूटा रिश्ता तो एक मां ने बेटी के लिए बदला घर मुकेश चौधरी, साइबर सुरक्षा भास्कर एक्सक्लूसिव भास्कर फर्स्ट पर्सन

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