भास्कर न्यूज | कोरबा तकनीकी खराबी आने से 4 दिनों के भीतर एचटीपीपी संयंत्र की तीन बिजली इकाइयां बंद हो गई। इनमें 210 मेगावाट की दो और 500 मेगावाट विस्तार की एक इकाइयां शामिल रही। इससे राज्य बिजली उत्पादन कंपनी का 920 मेगावाट उत्पादन कम हो गया। हालांकि सुधार कार्य के बाद गुरुवार तक इन इकाइयों को एक-एक कर लाइटअप कर दिया गया है और अब लोड बढ़ाने के साथ बंद इकाइयों को एचटीपीपी प्रबंधन उत्पादन में ले आई है। उत्पादन कंपनी की सर्वाधिक 1340 मेगावाट क्षमता का एचटीपीपी पावर प्लांट प्रदेश की घरेलू बिजली की जरूरतें पूरी करने में अहम योगदान निभा रही है। कंपनी के दूसरे पावर प्लांटों में डीएसपीएम संयंत्र की 500 मेगावाट क्षमता और मड़वा प्लांट की 1 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। एचटीपीपी पावर प्लांट में चार पुरानी इकाइयों के साथ संयंत्र परिसर में 500 मेगावाट की एक विस्तार इकाई भी है। टरबाइन में समस्या आने व ट्यूब लीकेज के कारण 210 मेगावाट की एक व चार नंबर की इकाई बंद हो गई। इसी बीच 24 फरवरी को 500 मेगावाट की विस्तार इकाई में तकनीकी खराबी आ गई। तीन इकाइयों के एक-एक कर बंद होने पर बांगो हाइडल प्लांट की मदद ली गई। इसकी क्षमता 120 मेगावाट की है। 40 मेगावाट की तीन इकाइयों से बिजली उत्पादन किया जाता है। एचटीपीपी संयंत्र के बंद बिजली इकाइयों के सुधार कार्य में जुटी टीम ने गुरुवार तक सभी इकाइयों को लाइटअप कर लिया है। डिमांड बढ़ने पर कोयले की खपत बढ़ेगी: अभी दिन ढलते ही ठंड का अहसास हो रहा है। लेकिन होली पर्व के बाद धूप तेज पड़ने और गर्मी बढ़ने पर राहत पाने बिजली उपकरणों का उपयोग बढ़ेगा। इससे संयंत्रों में कोयले की खपत बढ़ेगी। एचटीपीपी संयंत्र के मुख्य अभियंता एचके सिंह ने कहा कि खराबी के कारण बंद हुई एचटीपीपी संयंत्र की सभी तीन इकाइयों को लाइटअप कर बिजली उत्पादन किया जा रहा है। बुधवार को 500 मेगावाट की विस्तार इकाई ट्यूब लीकेज के कारण बंद हो गई थी। यह बिजली इकाई भी अब उत्पादन में आ गई है। 210 मेगावाट की एक इकाई को बिजली मांग व आपूर्ति के बीच बैलेंसिंग करने के लिए बंद की गई थी।


