सदर अस्पताल में हंगामा : घंटों पड़े रहे 4 शव डॉक्टर के इंतजार में बिलखते रहे परिजन

गुमला | जिले में गुरुवार को मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई। अलग-अलग प्रखंडों से आए चार शवों का पोस्टमार्टम सदर अस्पताल में होना था। लेकिन डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण पूरी प्रक्रिया घंटों तक ठप रही। सुबह 10 बजे से पोस्टमार्टम गृह के बाहर इंतजार कर रहे परिजन देर दोपहर तक भूखे-प्यासे भटकते रहे, मगर किसी ने उनकी सुध नहीं ली। जानकारी के अनुसार जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से चार शवों को पंचनामा के बाद पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया था। नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंपा जाना था, ताकि वे अंतिम संस्कार कर सकें। लेकिन अस्पताल में तैनात डॉक्टर के नहीं पहुंचने से हालात बिगड़ गए। पोस्टमार्टम के लिए डॉ. गणेश राम की ड्यूटी निर्धारित थी। परिजनों का आरोप है कि वे सुबह से ही डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे, लेकिन दोपहर 2 बजे तक पोस्टमार्टम शुरू नहीं हुआ। इस दौरान पोस्टमार्टम हाउस के बाहर दर्दनाक दृश्य देखने को मिला। कोई रोते-बिलखते जमीन पर बैठा था, तो कोई छांव की तलाश में भटक रहा था। कई परिजन दूर-दराज गांवों से शव लेकर पहुंचे थे। तेज धूप और भूख-प्यास ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी। एक परिजन ने आक्रोश जताते हुए कहा “हम सुबह से बैठे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। आखिर कब तक यूं ही इंतजार करें। बताया गया कि परिजनों की गुहार पर डॉ. गणेश ने वार्ड विजिट के बाद पोस्टमार्टम करने की बात कही थी, मगर वे समय पर नहीं पहुंचे। उनकी ड्यूटी दोपहर 3 बजे तक थी। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब दोपहर बाद भी डॉक्टर का अता-पता नहीं चला। आक्रोशित परिजन आखिरकार शिकायत लेकर गुमला थाना पहुंचे और पूरी स्थिति से पुलिस को अवगत कराया। थाना की पहल के बाद हरकत में आए अस्पताल प्रशासन ने अपराह्न करीब 3 बजे डॉक्टर को पोस्टमार्टम हाउस भेजा। इसके बाद एक-एक कर चारों शवों का पोस्टमार्टम किया गया। शाम ढलने तक प्रक्रिया पूरी हो सकी, तब जाकर परिजन अपने-अपने रिश्तेदारों के शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए रवाना हुए। इस घटना ने सदर अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब पोस्टमार्टम जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के लिए डॉक्टर की ड्यूटी तय थी, तो समय पर उनकी मौजूदगी क्यों सुनिश्चित नहीं की गई? घंटों तक शवों का यूं पड़े रहना और परिजनों का तड़पना क्या सिस्टम की लापरवाही नहीं दर्शाता।

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