भास्कर न्यूज | राजिम छत्तीसगढ़ की लोक धुनों से सजी एक यादगार शाम में जब मंजीरे की छनक और ढोलक की थाप गूंजी, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। हमर धरोहर कला संरक्षण समिति चंदना द्वारा आयोजित लोक कलाकार एवं साहित्यकार सम्मान समारोह में श्री राम संगीत कला केंद्र, राजिम की प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। समिति की अध्यक्ष अनिता देशमुख के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में अंचल के कलाकारों ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा को जीवंत कर दिया। भरथरी की मार्मिकता, नाचा की चंचलता, जसगीत की भक्ति और पंथी की सभी लोक विधाओं को कलाकारों ने गीत और नृत्य के संगम के रूप में प्रस्तुत किया। हर प्रस्तुति के साथ दर्शक भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए। संगीत केंद्र के संचालक तुलाराम साहू ने कहा कि लोकगीत हमारी संस्कृति की आत्मा हैं। इन्हें संरक्षित रखना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि बदलते दौर में लोग अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे में संगीत केंद्र में लोक संगीत का पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया है ताकि नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और विरासत को पहचान सके और उसे आगे बढ़ा सके।
कार्यक्रम का संचालन संतोष कुमार सोनकर मंडल ने कुशलतापूर्वक किया। इस अवसर पर तुलाराम साहू, रामकुमार देवांगन, लालिमा पटेल, नामदास लहरे, ज्योति साहू, गंगा मरकाम, हुलास साहू, चंदन साहू, टूकेश यादव, गोपाल चौधरी, भीष्म लहरी, ममता मरकाम, गोमती साहू, डेमिन यादव, नीतू साहू, संजना गीतांजलि सहित अनेक कलाकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह के अंत में सभी कलाकारों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर कलाकारों के चेहरे खिल उठे और दर्शकों ने देर रात तक कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया। लोकधुनों से सजी यह शाम क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृतियों में लंबे समय तक गूंजती रहेगी। साहू ने समिति की अध्यक्ष अनिता देशमुख के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सांस्कृतिक चिंतन के साथ इस प्रकार का आयोजन वास्तव में प्रेरणादायी है। कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले सभी छात्र-छात्राएं इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय द्वारा संचालित लोक संगीत के प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी हैं, जिन्होंने अपने हुनर से मंच को जीवंत बना दिया।


