प्रति आवेदक औसत ऋण ₹1.33 लाख रु. ही मिला, जो पिछले साल से कम

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत राजस्थान में मौजूदा वित्त वर्ष में 16 जनवरी तक साढ़े नौ माह में 14,64,129 आवेदकों को कुल 19 479.63 करोड़  रुपए का ऋण देकर बैंकों ने 22, 689.68 करोड़  रुपए के तय लक्ष्य का  85.85% हासिल कर लिया, लेकिन प्रति आवेदक ऋण राशि 4 फीसदी घटकर 1.33 लाख रुपए रह गई, जो पिछले वर्ष के प्रति आवेदक 1.41  लाख और राष्ट्रीय औसत 1.5 लाख रुपए से कम है। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष में योजना के तहत बैंकों ने जनवरी तक 58 फीसदी ऋण किशोर यानी 50 हजार से पांच लाख रुपए तक श्रेणी में दिए, जबकि, 50 हजार रुपए तक की शिशु श्रेणी में 9.34 %, तरुण श्रेणी में 29.04 % आैर तरुण प्लस श्रेणी में सबसे कम 2.70 % ऋण दिया गया। बैंकों का फोकस पांच लाख रुपए तक के ऋण पर ज्यादा रहा। बता दें, इस योजना के तहत 2024‑25 में 14, 43, 861  आवेदकों को 20 417.42 रुपए का ऋण मिला था। पांच लाख के कर्ज से छोटा व्यवसाय ही संभव, तरुण प्लस श्रेणी में ऋण बढ़ाए : उद्यमी राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष के. एल जैन का कहना है कि 5 लाख तक के मुद्रा लोन से क्लाउड किचन, डिजिटल स्टूडियो, मसाला उद्योग या आटा चक्की तथा पैकेजिंग यूनिट जैसा छोटा व्यवसाय तो शुरू किया जा सकता है। लेकिन, बड़ा बिजनेस के लिए ज्यादा पूंजी की जरूरत होती है। इसलिए तरुण प्लस स्कीम में लोन बढ़ाने की जरूरत है। इससे नए उद्यमी एसएमई यूनिट लगा सकेंगे। किस श्रेणी में कितना ऋण श्रेणी आवेदन ऋण राशि प्रति आवेदक औसत शिशु 4,69,373 1 819.58 38,766 किशोर 9,18,751 11 477.48 1,24,925 तरुण 72,582 5 657.31 7,79,437 तरुण प्लस 3,423 525.26 15,34,501 कुल 14,64,129 19 479.63 1,33,045 नोट :- कुल ऋण राशि करोड़ रुपए में और प्रति आवेदक ऋण रुपए में उद्यमी उत्तम कुमार पाराशर का मानना है कि 50,000 बहुत छोटी राशि है। इसमें बैंकों को जोखिम कम लगता है, लेकिन 10 लाख रुपए के ऋण को जोखिम मानते हैं। जबकि, मुद्रा योजना के तहत क्रेडिट गारंटी फंड फॉर माइक्रो यूनिट्स के माध्यम से बिना किसी कोलेटरल (गारंटी) के ऋण मिलता है। ऐसे में खाता एनपीए होने के बावजूद बैंकों को नुकसान नहीं होता। इसके मद्देनजर बैंक बड़ा लोन देने का जोखिम ले सकते हैं।

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