झारखंड में पहली बार जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एआई आधारित थर्मल कैमरों की स्थापना शुरू की जा रही है। वन विभाग ने 80 अत्याधुनिक थर्मल एआई कैमरे लगाने की योजना बनाई है। पहले चरण में ये कैमरे दलमा वन्यजीव अभयारण्य में लगाए जाएंगे, इसके बाद चांडिल और पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया रेंज में स्थापना होगी। कैमरों की स्थापना से पहले कोयंबटूर से आई विशेषज्ञों की टीम इलाके का सर्वे कर रही है। विभाग का दावा है कि अगले 10 दिनों के भीतर सभी कैमरे लगाकर चालू कर दिए जाएंगे। यह तकनीक स्वीडन से मंगाई गई है। इन थर्मल कैमरों की कार्यप्रणाली ऐसी होगी कि जंगल में कहीं भी आग लगने पर उठने वाला धुआं और गर्मी का पैटर्न कैमरा तुरंत पहचान लेगा।
वनकर्मियों को मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में सुविधा होगी कैमरे के सेंसर के सक्रिय होते ही सायरन बज उठेगा और एआई सॉफ्टवेयर संकेतों का विश्लेषण कर तुरंत नियंत्रण कक्ष को अलर्ट भेज देगा। इससे आग का पता शुरुआती चरण में ही चल जाएगा और वनकर्मियों को मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में सुविधा होगी। इस तकनीक से जंगलों में आग की घटनाओं पर तेजी से नियंत्रण पाया जा सकेगा। थर्मल एआई कैमरे हाथियों की गतिविधियों पर निरंतर निगरानी रखेंगे, जिससे मानव-हाथी संघर्ष कम होने की उम्मीद है। चांडिल और चाकुलिया रेंज हाथी प्रभावित क्षेत्र होने के कारण यहां यह तकनीक लागू की जाएगी। कैमरों में नाइट विज़न क्षमता है, जो अंधेरे में भी मूवमेंट को कैद कर सकेगी। कैमरे अवैध शिकार और संदिग्ध गतिविधियों पर भी निगरानी रखेंगे। झारखंड में पहली बार एआई आधारित थर्मल कैमरे लगाने का कदम हमारे जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा को नई दिशा देगा। इन कैमरों से जंगलों में आग की घटनाओं का तुरंत पता चलेगा और आग पर समय रहते काबू पाया जा सकेगा। कैमरे न केवल आग का अलर्ट देंगे, बल्कि हाथियों और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर भी नजर रखेंगे, जिससे मानव-हाथी संघर्ष को कम किया जा सकेगा। 10 दिनों के भीतर ये कैमरे लगा दिए जाएंगे। – सबा आलम अंसारी, डीएफओ।


