नमस्कार जोधपुर में कमिश्नर साहब रात में शहर की गलियों में घूमे, आगे के प्लान बताए, लेकिन घर पहुंचने से पहले जयपुर ट्रांसफर होने की खबर आ गई। जयपुर में किरोड़ी बाबा की जनसुनवाई में महिलाओं ने गीत गाए। आईपीएस अधिकारी ने आवास के बाहर लिखवाया-आगंतुक जूते-चप्पल न उतारें। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. जोधपुर में ‘हथाई’ पर अब तबादले की चर्चा सूर्यनगरी में कमिश्नर साहब अचानक रात में शहर का जायजा लेने निकले। जिधर से गुजरे उधर की थाना पुलिस अलर्ट। पुलिस के अधिकारी अलर्ट। साहब अलग ही अंदाज में नजर आ रहे थे। लोगों से मिल रहे थे। बात कर रहे थे। हंस रहे थे। कुशल-क्षेम पूछ रहे थे। उन्हें जोधपुर की ‘हथाई’ काफी अट्रैक्ट करती है। हथाई का मतलब मोहल्ले का वह चौक जहां लोग बैठकर चौपाल करते हैं, पंचायती करते हैं। अब मोबाइल-स्मार्ट टीवी के जमाने में कहां लोगों के पास हताई के लिए वक्त है। कमिश्नर साहब हथाई की परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए पुरजोर तरीके से जुटे हुए थे। कह रहे थे कि हथाई जोधपुर की जीवन-रेखा है। आगे भी इस परंपरा को जारी रखेंगे। गलियों में घूमते-घूमते काफी देर हो गई थी। आधी रात ही होने को आई थी। साहब कार में सवार होकर आवास की तरफ चले। आवास पहुंचने से पहले खबर आ गई कि जयपुर ट्रांसफर हो गया है। जोधपुर में हथाई पर अब साहब की ही बातें हो रही हैं। 2. किरोड़ी बाबा की जनसुनवाई में गीत एक भजन है- जीते भी लकड़ी, मरते भी लकड़ी, देख तमाशा लकड़ी का..। जिस प्रकार इंसान के जन्म लेने से लेकर सिधारने तक लकड़ी का महत्व है। उसी प्रकार हर मौके के लिए गीत गाने का भी महत्व है। गांवों में महिलाएं किसी भी काम से एक जगह जुटती हैं तो गीत गाने लगती हैं। एक माननीय ने तो जी-राम-जी योजना का जिक्र करते हुए रामजी का भजन गाना शुरू कर दिया था। केंद्र में राजस्थान के एक मंत्रीजी भजन और गीत गाने के लिए जाने जाते हैं। मंच, माइक और भीड़ सामने हो तो उनके भाषण भी अपने आप गीत में तब्दील हो जाते हैं। लेकिन यहां बात किरोड़ी बाबा की है। वे डांस के लिए प्रसिद्ध हैं। कई कन्हैया दंगल में घुटनों का शक्ति-प्रदर्शन कर चुके हैं। वे कृषि मंत्री हैं। जयपुर में अक्सर एयरपोर्ट इलाके में जनसुनवाई करते हैं। इस जनसुनवाई में अधिकतर शहर के आस-पास के गांवों के लोग समस्याएं और फरियादें लेकर आते हैं। बाबा एक फरियाद पर गौर कर रहे थे। सामने महिलाएं बैंठी थीं। बाबा की तारीफ में महिलाओं ने लोकगीत गाना शुरू कर दिया- बाबा जैसो नेतो राजस्थान में कोनै…। 3. IPS ने लिखवाया- आगंतुक जूते-चप्पल न उतारें मानवाधिकार में आईजीपी लगे IPS साहब ने आवास के बाहर लिखवाया है- आगंतुक जूते-चप्पल न उतारें। नेमप्लेट के नीचे चिपकाई गई इस इबारत का फोटो खींचकर उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर किया और लिखा- जूते-चप्पल उतरवाने अपमान जैसा होता है। वैसे आईपीएस साहब खुद जूते पहनकर तैयार रहने में यकीन करते हैं। एक समय की बात है। झारखंड में उनकी ड्यूटी थी। चुनावी मौसम था। वे बीमार महसूस कर रहे थे। उन्होंने छुट्टी के लिए अप्लाई किया। लेकिन छुट्टी नहीं मिली। चूंकि वे तय कर चुके थे कि जयपुर चलना ही है तो उन पर छुट्टी नहीं मिलने का भी फर्क नहीं पड़ा और वे बिना बताए जयपुर लौट आए। बाद में सस्पेंड भी हुए और बहाल भी। खैर, अब साहब इत्मीनान से हैं और दमदार रीलें बनवा रहे हैं। मानवतावादी विश्व समाज विचारधारा की मुहिम भी चला रहे हैं। 4 चलते-चलते.. वह कौन है जो महिला सशक्तिकरण का ढोल पीट रहा है। महिला कब कमजोर थी, जिसे अब सशक्तिकरण की जरूरत है? झांसी की रानी ने राज-पाट चलाया। इंदिरा गांधी ने पूरा देश चलाया। किरण बेदी ने दिल्ली में कानून का सिक्का चलाया तो अवनी चतुर्वेदी ने आसमान में मिग चलाया। किरण मजूमदार ने बिजनेस चलाया तो कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दमखम भी दिखाया और प्लान में खूब दिमाग चलाया। अब सोशल मीडिया पर अजमेर के श्रीनगर कस्बे की एक बुजुर्ग काकी का वीडियो शेयर हो रहा है। बाजार का दृश्य है। काकी बाइक पर सवार होती है। काकी के पीछे दूसरी काकी आकर बैठती है। फिर तीसरी काकी आकर बैठती है। फिर अंत में बीड़ी से फारिग होकर एक काका भी एडजस्ट हो जाता है। इसके बाद किक मारकर काकी तीनों सवारों को लेकर आगे बढ़ जाती है। काकी का वीडियो बना रहा युवक हैरान होता है कि काकी तीन सवारियां बैठाकर बाइक चला रही है। वह इसे महिला सशक्तिकरण से जोड़ता है। लेकिन भाई बात महिला सशक्तिकरण की नहीं है, महिलाएं तो शुरू से सशक्त हैं, जरूरी बात सिर्फ ट्रैफिक नियम का पालन करने और धूम्रपान न करने की है। इनपुट सहयोग- अरविंद सिंह (जोधपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी..


