PGI चंडीगढ़ में ‘जीवनदान’ की मिसाल:रूपनगर के 36 वर्षीय युवक ने बचाईं चार जिंदगियां, दो को मिली नई रोशनी

एक बड़ी व्यक्तिगत त्रासदी के बीच इंसानियत की मिसाल देखने को मिली। पंजाब के रूपनगर जिले के गांव सोलखियां के 36 वर्षीय दविंदर सिंह को पीजीआई चंडीगढ़ में ब्रेन डेड घोषित किया गया। इसके बाद उनके परिवार ने साहस दिखाते हुए उनके अंग और आंखें दान करने का निर्णय लिया। दविंदर सिंह पेशे से इलेक्ट्रिशियन थे और निजी काम करते थे। 21 फरवरी 2026 को उनका मोटरसाइकिल एक्सीडेंट हो गया, जब एक स्कूटी से टक्कर हुई। पहले उन्हें सिविल अस्पताल, रोपड़ ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत में पीजीआईएमईआर रेफर किया गया। तमाम प्रयासों के बावजूद 25 फरवरी 2026 को उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित कर दिया गया। पत्नी और पिता ने लिया अंगदान का निर्णय ब्रेन स्टेम डेथ की पुष्टि के बाद पीजीआई की ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन टीम ने परिवार को अंगदान के विकल्प के बारे में समझाया। गहरे शोक के बीच पत्नी गुरप्रीत कौर और पिता अमर सिंह ने सभी अंग व ऊतक दान करने की सहमति दी। दुखी पिता अमर सिंह ने कहा, हम अपने बेटे को नहीं बचा सके, लेकिन उसके अंगों से दूसरों की जान बच सके, यही सोचकर हिम्मत जुटाई। अगर वह किसी की सांस और धड़कन में जिंदा रहेगा तो हमें सुकून मिलेगा।द वहीं पत्नी गुरप्रीत कौर ने कहा, “वह सिर्फ 36 साल का था, परिवार की जिम्मेदारियां थीं। जब पता चला कि वह वापस नहीं आएगा, तो लगा सब खत्म हो गया। लेकिन हमने सोचा कि अगर वह हमारे साथ नहीं रह सकता तो दूसरों के जरिए जिंदा रहे। लिवर-फेफड़े दिल्ली व गुरुग्राम भेजे गए परिवार की सहमति के बाद पीजीआई टीम ने लिवर, फेफड़े, अग्न्याशय (पैंक्रियास), दोनों किडनी और कॉर्निया निकाले। लिवर को 26 फरवरी को दोपहर 2:20 बजे स्पाइसजेट की फ्लाइट से दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलरी साइंसेज (आईएलबीएस) भेजा गया, जहां 54 वर्षीय मरीज में प्रत्यारोपित किया गया। फेफड़े 3:45 बजे एयर इंडिया की फ्लाइट से गुरुग्राम के आर्टेमिस अस्पताल भेजे गए, जहां 72 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित किए गए। पीजीआई में दो किडनी और पैंक्रियास का ट्रांसप्लांट पीजीआई में 29 वर्षीय मरीज का एक साथ पैंक्रियास-किडनी (एसपीके) ट्रांसप्लांट किया गया, जिससे उसे इंसुलिन और डायलिसिस दोनों से राहत मिलेगी। दूसरी किडनी 37 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित की गई। वहीं, कॉर्निया से दो व्यक्तियों की आंखों की रोशनी बहाल की जाएगी। पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा, “अकल्पनीय दुख के क्षण में इस परिवार ने मानवता को चुना। दविंदर सिंह का अंगदान केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि आशा की स्थायी विरासत है। हर दान किया गया अंग एक जीवन, एक परिवार और एक भविष्य को नई शुरुआत देता है। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट व रोट्टो (नॉर्थ) के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि ब्रेन स्टेम डेथ की पुष्टि से लेकर अंगों के प्रत्यारोपण और एयर ट्रांसपोर्ट तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और समन्वय के साथ पूरी की गई।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *