बालोद शहर के नए बस स्टैंड में जिलेभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी त्रि-सूत्रीय मांगों को लेकर दो दिवसीय हड़ताल पर बैठीं। शुक्रवार दोपहर सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने शहर में रैली निकालकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो मार्च माह में प्रदेश स्तरीय धरना-प्रदर्शन कर विधानसभा का घेराव किया जाएगा। हड़ताल से कई आंगनबाड़ी केंद्रों में लटका ताला हड़ताल के कारण जिले के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में ताला लगा रहा, जिससे महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के संचालन पर असर पड़ा। कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे वर्षों से पोषण अभियान, टीकाकरण सहयोग, गर्भवती महिलाओं और बच्चों की देखभाल, सर्वे कार्य सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है और न ही नियमित कर्मचारियों की तरह वेतनमान व अन्य सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। शासकीय कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम वेतन और सुविधाओं की मांग हड़ताल की प्रमुख मांगों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषित करना शामिल है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि जिस तरह शिक्षा कर्मी और पंचायत कर्मियों को नियमित किया गया। उसी तरह उन्हें भी नियमित किया जाए। साथ ही शासकीय कर्मचारी घोषित होने तक न्यूनतम वेतन लागू करने, मध्यप्रदेश की तर्ज पर सभी सुविधाएं देने और प्रतिवर्ष 1000 रुपये मानदेय वृद्धि का प्रावधान करने की मांग की गई है। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा के तहत मासिक पेंशन, बीमा, सेवानिवृत्ति लाभ, मृत्यु पर एकमुश्त राशि और ग्रेच्युटी देने की मांग भी उठाई गई। मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान मानदेय महंगाई के अनुरूप पर्याप्त नहीं है। जिससे परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ने मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इस दौरान प्रदेश भारतीय महासंघ की महामंत्री माधुरी रथ, जिलाध्यक्ष बिटा साहू, डामीन ज्योति, आयशा खान, कल्याणी साहू, संतोषी मंडावी, आशा गोस्वामी, सुनीता, कमला चंद्राकर, प्रभा देवी, अनीता मेश्राम सहित बड़ी संख्या में जिलेभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं मौजूद रहीं।


