राज्य सरकार के “पंच गौरव” कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को संगरिया स्थित कृषि विज्ञान केंद्र ग्रामोत्थान विद्यापीठ में किन्नू महोत्सव का आयोजन किया गया। उद्यान विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से हुए इस आयोजन में जिले और आसपास के क्षेत्रों से करीब 550 किसान, प्रगतिशील बागवान, वैज्ञानिक और अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में जिला परिषद सीईओ ओ.पी. बिश्नोई ने कहा कि हनुमानगढ़ किन्नू उत्पादन के लिए एक उपयुक्त क्षेत्र है। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक पद्धतियों, संतुलित पोषण प्रबंधन और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर पहचान बना सकें। बिश्नोई ने उद्यानिकी को बढ़ावा देने के लिए प्रशासनिक सहयोग का आश्वासन भी दिया। तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने किन्नू उत्पादन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। डॉ. जितेंद्र सिंह बराड़ ने साइट्रस फसलों में मृदा परीक्षण और पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया। क्षेत्रीय फल अनुसंधान केंद्र अबोहर के डॉ. कृष्ण कुमार ने उन्नत किस्मों, रोग प्रबंधन और निर्यात की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। इसी सत्र में डॉ. बी.एस. यादव ने माइक्रो इरिगेशन और मल्चिंग तकनीकों के लाभ बताए। डॉ. विनोद सहारण ने कटाई उपरांत प्रबंधन, ग्रेडिंग, पैकिंग और मूल्य संवर्धन की विस्तृत जानकारी दी। कृषि अधिकारी डॉ. साहबराम गोदारा ने किसानों को विभागीय योजनाओं और अनुदानों के बारे में अवगत कराया। महोत्सव के दौरान एक फल और सब्जी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें किसानों ने उच्च गुणवत्ता के उत्पाद प्रदर्शित किए। विभिन्न विभागों और कंपनियों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर नवीन कृषि यंत्र, उन्नत किस्में और जैविक उत्पाद प्रदर्शित किए गए। अंत में, उत्कृष्ट प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनूप कुमार ने कहा कि ऐसे आयोजनों से किन्नू उत्पादन को वैज्ञानिक आधार मिलेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।


