राजनांदगांव शहर का 14 किलोमीटर लंबा लखोली बाईपास, जो सीआईटी कॉलेज अनंत पैलेस चौक चौराहे से शुरू होता है, वर्तमान में खराब स्थिति में है। भारी वाहनों के लगातार दबाव और उचित रखरखाव के अभाव में इस महत्वपूर्ण मार्ग का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है। इस कारण 14 किलोमीटर की दूरी तय करने में ट्रक और ट्रेलर जैसे भारी वाहनों को 30 से 35 मिनट का समय लग रहा है। सड़क पर 40 से अधिक बड़े और खतरनाक गड्ढे हो गए हैं। इन गड्ढों के कारण वाहन चालक अक्सर नियंत्रण खो देते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। बाईपास का लगभग 80 फीसदी हिस्सा अंधेरे में डूबा रहता है क्योंकि स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। रात के समय यह स्थिति लूटपाट और गंभीर सड़क हादसों का खतरा बढ़ा देती है। पिछले एक साल में यहां लूट की 10 से अधिक वारदातें और कई मौतें दर्ज की गई हैं। करीब डेढ़ साल पहले लोक निर्माण विभाग ने मरम्मत का अभियान चलाया था, लेकिन काम की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि पहली ही बारिश में पैच वर्क उखड़ गया। दुर्ग और नागपुर दोनों दिशाओं से आने वाले भारी वाहनों को इसी मार्ग से डायवर्ट किया जाता है। रोजाना यहां से 3,000 से अधिक भारी वाहन गुजरते हैं, जिनकी भार क्षमता सहने की स्थिति में अब यह सड़क नहीं रही। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों के अनुसार, बाईपास के नए सिरे से निर्माण और डामरीकरण के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। ईई, लोक निर्माण विभाग एस.के. चौरसिया ने बताया, “बाईपास की स्थिति को देखते हुए नए निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।” उखड़ी सड़क और उड़ती धूल के कारण आसपास के ग्रामीणों और छोटे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाईपास की लाइटें बंद होने से सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।


