चित्तौड़गढ़ में 2 मार्च को होगा होलिका दहन:4 मार्च को होगा रंगोत्सव, श्रीसांवलिया जी में खेला जाएगा फागोत्सव

चित्तौड़गढ़ में इस बार होली और धुलंडी अलग-अलग दिन मनाई जाएगी। 2 मार्च को होलिका दहन होगा, जबकि धुलंडी 4 मार्च को मनाई जाएगी। 3 मार्च को सूतक काल और चंद्र ग्रहण के कारण रंगों का त्योहार नहीं मनाया जाएगा। वहीं श्री सांवलिया जी मंदिर में भी होली को लेकर खास कार्यक्रम तय किए गए हैं। मंदिर में 2 मार्च को भंडार खोला जाएगा, 3 मार्च को सूतक काल में पट बंद रहेंगे और 4 मार्च को फूलडोल महोत्सव व बेवाण यात्रा निकाली जाएगी। मंदिर प्रशासन और संतों ने श्रद्धालुओं से तय समय के अनुसार ही कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। महंत चंद्र भारती ने बताया – 3 मार्च को रहेगा सूतक, 4 को खेली जाएगी धुलंडी श्री हजारेश्वर महादेव मंदिर के महंत चंद्रभारती जी महाराज ने बताया कि 2 मार्च को शाम 6:30 बजे से रात 9:00 बजे तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है। इसी समय विधि-विधान से होलिका दहन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 3 मार्च को सुबह 9:30 बजे से सूतक काल शुरू हो जाएगा, जो शाम 6:47 बजे तक रहेगा। इसके बाद चंद्र ग्रहण लगेगा। चूंकि ग्रहण शाम को रहेगा, इसलिए 3 मार्च को धुलंडी नहीं मनाई जाएगी। रंगों का त्योहार 4 मार्च की सुबह मनाया जाएगा। महंत ने लोगों से कहा कि वे परंपरा और धार्मिक नियमों का ध्यान रखें और सही दिन पर ही होली का पर्व मनाएं। सांवलिया जी मंदिर में 2 को भंडार, 3 को पट बंद रहेंगे श्री सांवलिया जी मंदिर मंडल की मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रभा गौतम ने बताया कि 2 मार्च को मंदिर में डेढ़ महीने का भंडार खोला जाएगा। 3 मार्च को सुबह 9:45 बजे से शाम 6:45 बजे तक सूतक काल रहेगा। इस दौरान मंदिर के पट बंद रहेंगे और दर्शन नहीं होंगे। शाम 6:45 बजे के बाद मंदिर की नियमित व्यवस्था फिर से शुरू कर दी जाएगी और श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि 3 और 4 मार्च को चंद्र ग्रहण और होली के कारण आमजन के लिए मंदिर की भोजनशाला भी बंद रहेगी। 4 मार्च को फूलडोल महोत्सव, चांदी के रथ में निकलेगी बेवाण यात्रा प्रभा गौतम ने बताया कि 4 मार्च को राजभोग आरती के बाद दोपहर 12 बजे फूलडोल महोत्सव शुरू होगा। मंदिर के पुजारियों द्वारा ठाकुर जी को फूल और गुलाल अर्पित किए जाएंगे और बैंड-बाजे के साथ बेवाण यात्रा निकाली जाएगी। ठाकुर जी को चांदी के रथ में बैठाकर नगर भ्रमण करवाया जाएगा। यात्रा शाम करीब 4 बजे मंदिर लौट आएगी। मंदिर परिसर के अंदर रंग और गुलाल का उपयोग पूरी तरह से वर्जित रहेगा, जबकि बाहर श्रद्धालु होली खेल सकेंगे। शाम 5 बजे देवकी सदन धर्मशाला में महाप्रसाद का आयोजन होगा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। भगवान को फीकी और मीठी पकौड़ी का भोग लगाया जाएगा और पूरा कार्यक्रम सादगी व व्यवस्था के साथ संपन्न होगा।

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