गर्मी से पहले हादसों से बचने रेलवे कर्मचारियों की ट्रेनिंग:आपातकाल से निपटने का तरीका बताया, कहा- पैनिक नहीं होना मतलब आधी समस्या सॉल्व

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर रेल मंडल में ट्रेनों को सुरक्षित चलाने को लेकर खास ट्रेनिंग कार्यक्रम रखा गया। ट्रेनिं के दौरान कर्मचारी ट्रेनिंग स्कूल/परिचालन/बीएमवाई में परिचालन, इलेक्ट्रिकल और इंजीनियरिंग विभाग के 52 कर्मचारियों को अलग-अलग तरह की आपात स्थिति से निपटने की प्रैक्टिकल जानकारी दी गई। रेलवे का कहना है कि ट्रेन चलाने में छोटी सी गलती भी बड़ा हादसा बन सकती है, इसलिए कर्मचारियों को समय-समय पर दोबारा ट्रेनिंग देना जरूरी है। इस ट्रेनिंग में उन आपातकाल स्थितियों पर खास फोकस रहा, जो अचानक बनती है और इसक चलते कर्मचारी या तो नर्वस हो जाते हैं या तो पैनिक कर जाते हैं। इनमें सिग्नल फेल हो जाना, ट्रेन को सेफली खड़ा करना इसके अलावा बढ़ रही गर्मी को देखते हुए अचानक आग लगने पर कैसे रिएक्ट करना है और क्या प्रिकॉशनरी स्टेप्स उठाने की इसकी जानकारी भी दी गई। 1. ऑटोमेटिक सिग्नल बंद होने पर धीमी गति में ट्रेन चलाने की सलाह अगर ऑटोमेटिक सिग्नल काम करना बंद कर दे या बीच ब्लॉक (आईबी) सिग्नल में दिक्कत आ जाए, तो लोको पायलट को किस रफ्तार से ट्रेन चलानी है, किस तरह कंट्रोल रूम से संपर्क रखना है और किन नियमों का पालन करना है—यह विस्तार से समझाया गया। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए आगे की पटरी पर दूसरी ट्रेन खड़ी है और सिग्नल बंद है। अगर चालक बिना नियम माने तेज गति से आगे बढ़े तो टक्कर हो सकती है। लेकिन अगर वह तय कम स्पीड और सतर्कता के साथ आगे बढ़े, तो हादसा टल सकता है। 2. यार्ड में शंटिंग के दौरान सावधानी
ट्रेनों को जोड़ने-अलग करने के समय अक्सर छोटी दूरी पर मूवमेंट होता है। इस दौरान सिग्नल, पॉइंट और आपसी समन्वय बहुत जरूरी होता है। कर्मचारियों को बताया गया कि इस दौरान जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। 3. ट्रेन को सुरक्षित खड़ा करना कर्मचारियों को एक्सपर्ट ने बताया अगर ब्रेक ठीक से नहीं लगाया गया तो ढलान पर खड़ी ट्रेन खिसक सकती है। ऐसे में ट्रेन को सुरक्षित करते समय पूरी सतर्कता जरूरी है। 4. गर्मी से पहले ट्रैक की तैयारी
गर्मी में रेल की पटरियां फैलती हैं। इसलिए इंजीनियरिंग विभाग को पहले से ट्रैक चेकिंग, मरम्मत और जरूरी काम करने के निर्देश दिए गए, ताकि गर्मी में ट्रैक से जुड़ी समस्या न हो। 5. ट्रेन में आग लग जाए तो क्या करें?
लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर की जिम्मेदारी क्या होगी—इसकी जानकारी दी गई। आग लगने पर पहले ट्रेन रोकना, कंट्रोल को सूचना देना, यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना और फायर एक्सटिंग्विशर का सही उपयोग करना सिखाया गया। 6. फर्स्ट एड और अग्निशामक यंत्र का उपयोग
प्राथमिक उपचार पेटी (फर्स्ट एड बॉक्स) और आग बुझाने वाले यंत्र को चलाकर दिखाया गया, ताकि जरूरत पड़ने पर कर्मचारी घबराएं नहीं। क्यों जरूरी है ऐसी ट्रेनिंग? रेलवे में कई बार हादसे नियमों की अनदेखी या घबराहट में गलत फैसला लेने से होते हैं। ऐसी ट्रेनिंग से कर्मचारियों को याद दिलाया जाता है कि आपात स्थिति में क्या करना है और क्या नहीं करना है। अगर हर कर्मचारी तय प्रक्रिया का पालन करे, तो बड़ी दुर्घटना को भी टाला जा सकता है। क्या होगा फायदा? रेल मंडल में हर महीने ऐसे दो कार्यक्रम अलग-अलग स्टेशनों पर किए जाते हैं, ताकि सुरक्षा को लेकर जागरूकता लगातार बनी रहे।

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