जब जाकिर हुसैन ने तबले पर सुनाई घुंघरू-डमरू-ट्रेन की आवाज:5 साल पहले भोपाल आए थे उस्ताद; कहा था-कुछ गलत बजाऊं तो ताली बजा देना

प्रख्यात तबला वादक और पद्म विभूषण उस्ताद जाकिर हुसैन अब भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनसे जुड़ी यादें हमेशा ताजा रहेंगी। मध्यप्रदेश से भी उनकी कुछ यादें जुड़ी हैं। उस्ताद जाकिर हुसैन 2 मार्च 2019 को भोपाल आए थे। उन्होंने भारत भवन के मुक्ताकाश मंच पर परफॉर्मेंस दी थी। इस दौरान उन्होंने कहा था- कुछ तालियां बचाकर रखो। कुछ गलत बजाऊं तो ताली बजा देना। भारत भवन विश्व विख्यात कला का केंद्र है। ऐसे केंद्र में आकर अपनी प्रस्तुति के माध्यम से योगदान देना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। उस्ताद ने डेढ़ घंटे की परफॉर्मेंस में घुंघरू, डमरू, बुलेट बाइक और ट्रेन का साउंड निकाला था। यह अपने आप में बेहद खास प्रस्तुति थी। उस्ताद ने तबले से ही शंख और डमरू, हिरण की मनमोहक चाल और बारिश की बूंदों जैसी आवाज निकाल कर श्रोताओं को हैरत में डाल दिया था। इस दौरान वे बीच-बीच में श्रोताओं से मजाकिया अंदाज में संवाद भी कर रहे थे। 2019 में भोपाल में उस्ताद की प्रस्तुति की 4 तस्वीरें- ध्रुपद संस्थान में कलाकारों के बीच समय बिताया था
जाकिर हुसैन तब सूरज नगर स्थित ध्रुपद संस्थान भी पहुंचे थे। यहां उन्होंने संस्थान के स्टूडेंट्स और अन्य कला प्रेमियों, कलाकारों से बातचीत कर उनके बीच समय बिताया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि ध्रुपद संस्थान संगीत का मंदिर है, यहां आकर बहुत अच्छा लगा। इस मौके पर उन्होंने संस्थान के स्टूडेंट्स के लिए बने कमरों का उद्घाटन भी किया था। उस्ताद ने याद किया था 100 रुपए के नोट का किस्सा
उस्ताद जाकिर हुसैन ने भोपाल में 100 रुपे के नोट का किस्सा भी बताया था। उन्होंने कहा था कि एक बार उन्हें अपने पिता के साथ प्रेस कोर प्रोग्राम में जाना था। उसमें उस्ताद अली अकबर खां भी थे। मैंने उसके साथ तबला बजाया। उन्होंने खुश होकर मुझे 100 का नोट दिया। वह नोट चलन में नहीं है, फिर भी मैंने अब तक इसे सहेजकर रखा है। वो आज भी मेरे लिए करोड़ों रुपयों से भी ज्यादा कीमती है। मेरी पहली प्रस्तुति और प्रोफेशनल करियर की शुरुआत भी उस्ताद अली अकबर खां के साथ ही हुई है। ये भी बताया था- मुगल-ए-आजम में ऑफर हुआ था रोल
उस्ताद जाकिर हुसैन को मुगल-ए-आजम फिल्म में युवा सलीम का रोल ऑफर हुआ था। इस पर बात करते हुए भोपाल में उन्होंने कहा था, ‘मोहन स्टूडियो में शीशमहल का सेट लगा हुआ था। फिल्म प्यार किया तो डरना क्या… की शूटिंग हो रही थी। डायरेक्टर के. आसिफ मेरे पिता के बड़े अच्छे दोस्त थे। दिलीप साहब ने मुझे देखकर आसिफ साहब से कहा- ठीक है, मतलब हो गया था। आसिफ साहब ने मेरे पिता से बात की, तो वे नाराज हो गए। बोले- नहीं, वो तबला बजाएगा, उसको एक्टर थोड़ी बनना है। यहीं से मेरी एडिटिंग हो गई।’ बता दें, फिल्म में युवा सलीम का किरदार जलाल आगा ने निभाया था। यह खबर भी पढ़ें… तलत अजीज बोले- उस्ताद जाकिर हुसैन का निधन परसों हुआ विश्वविख्यात तबला वादक और पद्म विभूषण उस्ताद जाकिर हुसैन का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर रविवार रात से आ रही थी, लेकिन सोमवार सुबह परिवार ने इसकी पुष्टि की। वे इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस से जूझ रहे थे और दो हफ्ते से सैन फ्रांसिस्को के अस्पताल में भर्ती थे। यह खबर भी पढ़ें…

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