राजस्व मंत्री के जीजा सीएमएचओ को जेल:गलत आदेश अपलोड करने की बात पर छिड़ी बहस, संसोधित आदेश से पहले फरियादी को भुगतान

राजस्थान उच्च न्यायालय का एक फैसला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें राज्य सरकार के मंत्री हेमंत मीणा के जीजा और प्रतापगढ़ के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. जीवराज मीणा को अदालती आदेश की अवहेलना पर सात दिन की सिविल जेल की सजा सुनाई गई है। इस फैसले को लेकर कांग्रेस, बीजेपी और बीएपी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। बाद में हाईकोर्ट ने गलत आदेश अपलोड होने का हवाला देकर संशोधित आदेश अपलोड करने के निर्देश दिए। इस बीच सीएमएचओ ने फरियादी को वेतन राशि का भुगतान कर दिया है। मामला साल 2016 में दायर की गई रिट याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता शंकरलाल मीणा ने अपने सेवा लाभ (चयन ग्रेड और वेतनमान) के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने 24 अक्टूबर 2016 को आदेश जारी कर तीन महीने के भीतर लाभ देने का निर्देश दिया। लेकिन आठ साल तक इस आदेश को नजरअंदाज किया गया। जिस पर अदालती आदेश का पालन नहीं होने के कारण 2017 में याचिकाकर्ता ने अदालत की अवमानना याचिका दायर की। मामले की सुनवाई कई बार सूचीबद्ध हुई, लेकिन सरकारी वकीलों ने बार-बार समय की मांग की। न्यायालय ने पाया कि अधिकारी न केवल आदेश का पालन करने में विफल रहे, बल्कि कोई ठोस स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत नहीं किया। 18 नवंबर 2024 को अदालत ने डॉ. जीवराज मीणा को व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश दिया। लेकिन 9 दिसंबर 2024 की सुनवाई में अधिकारी अदालत में खाली हाथ और बिना स्पष्टीकरण पहुंचे। जिस पर न्यायमूर्ति दिनेश मेहता ने सरकारी अधिकारियों के रवैये को गंभीर बताते हुए कहा कि यह जानबूझकर की गई अवमानना है। राज्य के अधिकारियों का यह व्यवहार न्यायिक आदेशों और अदालत की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने आगे कहा कि आठ वर्षों की देरी केवल लापरवाही नहीं है, बल्कि यह न्यायालय के आदेशों का अपमान है। हाईकोर्ट के वायरल आदेश में अदालत ने डॉ. जीवराज मीणा को सात दिन की सिविल जेल की सजा सुनाई और कहा कि यदि 15 जनवरी 2025 तक इस आदेश के खिलाफ अपील नहीं की गई, तो प्रतापगढ़ पुलिस अधीक्षक उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजें। जिला अभिभाषक संघ के जिलाध्यक्ष अरुण पाटीदार ने बताया कि अगर इस तरह के किसी मामले में कोई आदेश वायरल हो जाता है, वायरल आदेश का कोई भी कुछ इस्तेमाल करता है, उसका तो कुछ नहीं हो सकता है। लेकिन मामले से जुड़े दोनों पक्ष के लोगों में से किसी को भी अगर कोई आपत्ति है तो वह रिव्यू पिटीशन दायर कर सकता है या फिर मामले में सुप्रीम कोर्ट की शरण ली जा सकती है। संशोधित आदेश अपलोड करने के निर्देश के बाद सोशल मीडिया पर लगे आरोप-प्रत्यारोप सोशल मीडिया पर कांग्रेस और बीएपी के कार्यकर्ताओं ने सीएमएचओ को जेल की सजा वाला आदेश वायरल किया और मंत्री और उनके जीजा जीवराज मीणा को घेरना शुरू कर दिया। इसके बाद भाजपा के लोगों ने हाईकोर्ट द्वारा जारी नए आदेश को वायरल कर कांग्रेस और बीएपी को घेरना शुरू किया। इससे सोशल मीडिया पर यह मामला और चर्चित हो गया। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 9 दिसंबर का गलत आदेश अपलोड हो गया था। इसके लिए न्यायालय ने 12 दिसंबर को आदेश को तुरंत हटाने का निर्देश दिया। संशोधित आदेश को अधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने की बात कही। चूंकि डॉ. जीवराज मीणा, राज्य सरकार में मंत्री हेमंत मीणा के जीजा हैं, इसलिए कांग्रेस, बीएपी और बीजेपी कार्यकर्ता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा को घेरते हुए प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं और भाजपा इसे तकनीकी भूल बताते हुए सफाई दे रही है। हालांकि कोर्ट द्वारा जो संशोधन करवाया गया है, खबर लिखने तक उसकी कॉपी प्राप्त नहीं हो पाई है। मामले में कोर्ट ने जो संशोधन करवाया है, उसका भी क्षेत्र के लोग इंतजार कर रहे हैं। मल्टीपर्पज वर्कर शंकरलाल मीणा ने बताया कि अभी मुझे कुछ भुगतान सीएमएचओ ऑफिस से कर दिया है। कुछ बाकी है जो 15 तारीख तक देने को कहा है। हाईकोर्ट के जो आदेश वायरल हो रहे हैं, उसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। कोर्ट के आदेश के अनुसार राशि का भुगतान कर दिया कोर्ट के आदेश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) जीवराज मीणा ने पीड़ित के खाते में राशि हस्तांतरित कर दी। सीएमएचओ ने बताया कि यह मामला पिछले 8 वर्षों से लंबित था। पहले के अधिकारियों ने इसमें रिव्यू पिटीशन दायर की थी। मामले में प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय मांगा गया था। हालांकि, आवश्यक दस्तावेजों की जांच और भुगतान प्रक्रिया में देरी के कारण राशि पीड़ित के खाते में समय पर ट्रांसफर नहीं हो सकी। मीणा ने प्रतापगढ़ पहुंचने के बाद तत्काल अधिकारियों से चर्चा की और कोर्ट के आदेश के अनुसार पीड़ित के खाते में राशि हस्तांतरित कराई। दस्तावेजों की गहन जांच-पड़ताल के बाद बिल को ट्रेजरी भेजा और आदेश का पालन सुनिश्चित किया। अब पीड़ित को उसकी राशि मिल चुकी है। सीएमएचओ ने कहा कि न्यायालय के आदेशों का पालन करना प्राथमिकता है। इस मामले में देरी अवश्य हुई, लेकिन अब प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसकी जानकारी हमने कोर्ट में भी सबमिट करवा दी है।

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