भाजपा समर्थितों ने आदित्यपुर -रांची किला बरकरार रखा, झामुमो समर्थित ने पहली बार गिरिडीह पर कब्जा जमाया

आधी सीटों पर बिना समर्थन वाले जीते, झामुमो-कांग्रेस से आगे भाजपा 48 नगर निकायों के चुनाव में इस बार चौंकाने वाला रुझान देखने को मिला। करीब आधी सीटों पर बिना सम​ि​र्थत उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया। इन प्रत्याशियों ने किसी भी राजनीतिक दल का औपचारिक समर्थन नहीं लिया था। सिमडेगा नगर परिषद को छोड़कर अन्य सभी नगर परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्षों की घोषणा हो चुकी है। नगर निगमों के कुछ मेयर पदों के नतीजे अभी शेष हैं, लेकिन अब तक के रुझानों में भाजपा झामुमो और कांग्रेस से आगे दिख रही है। आदित्यपुर और रांची में भाजपा ने अपना किला बरकरार रखा है। राजधानी रांची में पार्टी की पकड़ कायम रही। हालांकि गिरिडीह में उसे बड़ा झटका लगा है। गिरिडीह नगर निगम पर झामुमो ने पहली बार कब्जा जमाया। यह भाजपा के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। इसी तरह देवघर नगर निगम में भी झामुमो को पहली बार जीत मिली है। पिछले चुनाव में यहां रीता राज खवाड़े निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मेयर बनी थीं। इन दोनों जीतों से झामुमो की शहरी क्षेत्र में पकड़ मजबूत होने के संकेत मिले हैं। धनबाद में कड़ी टक्कर: मेदिनीनगर में भाजपा अपनी पुरानी सीट बचाने में कामयाब रही। पूर्व मेयर अरुणा शंकर को कांग्रेस की नम्रता त्रिपाठी से कड़ी टक्कर मिली। धनबाद में सियासी समीकरण और भी दिलचस्प हैं। भाजपा के पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल इस बार झामुमो के समर्थन से मैदान में हैं। वहीं भाजपा के पूर्व विधायक संजीव सिंह के चुनाव मैदान में उतरने से पार्टी को बैकफुट पर जाना पड़ा है। मानगो और चास में नई तस्वीर: मानगो में पहली बार नगर निगम का चुनाव हुआ। यहां पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की प|ी ने जीत दर्ज की है। चास में पूर्व मेयर भोलू पासवान फिर से अपनी सीट बचा ली है। इन चुनावों में बिना सम​ि​र्थत उम्मीदवारों का प्रदर्शन सबसे ज्यादा चर्चा में है। आधी सीटों पर उनकी जीत ने यह संकेत दिया है कि स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत छवि का असर दलगत राजनीति पर भारी पड़ा है।

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