रांची झारखंड विधानसभा से शुक्रवार को ग्रामीण विकास विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग और पंचायती राज विभाग की अनुदान मांग पारित हो गई। इन तीनों विभाग की कुल अनुदान मांग 19,711 करोड़ 88 लाख 86 हजार करोड़ रुपए थी। वहीं, विपक्ष का कटौती प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज हो गया। वाद-विवाद के दौरान दोनों पक्षों ने बिलो रेट पर टेंडर आवंटित होने का मामला उठाया। सड़क, पुल-पुलिया और अधिकारियों द्वारा विधायकों के कामों को तरजीह नहीं देने की बात पर पक्ष-विपक्ष एक मत था। दो तरह के अफसर होते हैं : प्रदीप प्रसाद ने कहा कि ग्रामीण विकास विभाग की आधी राशि भी खर्च नहीं हुई है। पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके आप्त सचिव और वीरेंद्र राम का विकास हुआ। यहां दो तरह के अधिकारी हैं- एक घूसखोर तो दूसरा अतिघूसखोर। सदन में गोल-मटोल जवाब दिया जाता है। हेमलाल बोले- बिलो टेंडर का चल रहा प्रचलन : हेमलाल मुर्मू ने कहा कि बिलो टेंडर का प्रचलन चल रहा है। यह 25 से 35% तक जा रहा है। इससे कार्य की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके रोका जाना चाहिए। झामुमो के मथुरा महतो ने भी बिलो टेंडर का विषय उठाया। हेमलाल मुर्मू ने कहा कि अधीक्षण अभियंता को चीफ इंजीनियर का काम दिया जा रहा है। सक्षम पदाधिकारी का पदस्थापन होना चाहिए। 2024-25 का टेंडर अब तक निष्पादित नहीं हुआ। मंत्री मामले में बोल्ड डिसिजन लें। ग्रामीण विकास विभाग के तीन पूर्व मंत्री जा चुके हैं जेल : ग्रामीण विकास विभाग के बजट पर जेएलकेएम के जयराम महतो ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की मासिक खर्च 2946 रुपए और शहरी क्षेत्रों में मासिक खर्च 5393 रुपए है। गांव और शहर के बीच की इस खाई को पाटना होगा। विचौलियों पर अंकुश लगाना होगा। उन्होंने मंत्री को सलाह दी कि सावधान रहिए, इस विभाग के तीन पूर्व मंत्री जेल जा चुके हैं। सड़क पुल निर्माण में जनता की फीडबैक लीजिए। मनरेगा में सीमित क्षेत्र में काम होता थाः भाजपा के अमित यादव ने कहा कि पहले मनरेगा में सीमित क्षेत्र में काम होता था। कार्य की गुणवत्ता नहीं थी। इसलिए जी राम जी योजना को लाया गया। इसमें सभी कार्यों को लिया जाएगा। अमित ने अबुआ आवास की किस्त जारी करने की मांग की। यह भी कहा कि आंबेडकर आवास का टारगेट पूरा नहीं हुआ। अबुआ आवास का नाम दिशोम गुरु हो: सुरेश बैठा ने कहा कि मनरेगा अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए था। पेसा कानून में जो खामियां हैं, उसे सुधाने का प्रयास होना चाहिए। अबुआ आवास का नाम दिशोम गुरु अबुआ आवास किया जाना चाहिए। वहीं, माले के चंद्रदेव महतो ने कहा कि अबुआ आवास की लंबित योजनाएं पूरी की जाए। ग्राम सभा को मजबूत किया जाए। कटौती प्रस्ताव पर डॉ. नीरा यादव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता धरातल पर नहीं दिखती है। उपयोगिता प्रमाण-पत्र नहीं देने के कारण केंद्र से अनुदान नहीं मिला है। 47 हजार 370 करोड़ का उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं भेजा गया है। केंद्र के पास किन-किन विभागों का कितना बकाया है, इस पर संयुक्त बैठक होनी चाहिए। हमलोग राज्यहित में पैसा लेकर आएंगे। इसपर पेयजल मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि पेयजल का 6207 करोड़ बकाया है।


