भास्कर न्यूज| धमतरी
धमतरी शहर के 40 वार्डों में अवैध प्लाटिंग और कॉलोनियों का विस्तार जोर-शोर से हुआ, जिससे नगर निगम और राज्य सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचा। जिला प्रशासन ने शहर में 30 ऐसी अवैध कॉलोनियों की पहचान की है, जिनसे निगम द्वारा करीब 3 करोड़ रुपए राजस्व प्राप्ति का अनुमान था। इन कॉलोनियों में रहने वालों की मांग पर नगर निगम ने इनमें से 13 कॉलोनियों को नियमित कर दिया, जिससे करीब 1.50 करोड़ रुपए राजस्व जुटने की संभावना थी। हालांकि, निगम को केवल 40 लाख रुपए ही प्राप्त हुए। अवैध कॉलोनियों में मौजूद खाली भूखंड खरीदने वाले लोग अपने निर्माण कार्य को वैध कराने के लिए आगे आए, लेकिन जिन निवासियों ने पहले ही अपने मकान बना लिए हैं, वे नियमितीकरण प्रक्रिया में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। नतीजा, नगर निगम लाखों रुपए का नियमितीकरण शुल्क वसूलने में असमर्थ है। इसके बावजूद निगम इन कॉलोनियों में सड़क, नाली, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। अभी भी 17 अवैध कॉलोनियों का मामला अधर में है। नगर निगम ने इन्हें नियमितीकरण के लिए नगर निवेश विभाग को भेजा है, लेकिन समिति की बैठक लंबे समय से नहीं होने के कारण ये प्रस्ताव अटका हुआ है। यदि यह प्रक्रिया पूरी हो जाती, तो निगम इन कॉलोनियों को वैध कर टैक्स वसूली का काम शुरू कर सकता था। 30 में से 13 नियमित हो चुकी हैं कॉलोनियां जिला प्रशासन द्वारा खसरा नंबरों के आधार पर कई क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग चिन्हित की गई है। इनमें ओजस्वी नर्सिंग होम के सामने, इंडोर स्टेडियम के पीछे, दानीटोला शराब दुकान के पास, जैविक खाद संयंत्र के सामने, अर्जुन रेसीडेंसी के पीछे, सिहावा चौक धनवंतरी के पास, इंडेन गैस के पास, महालक्ष्मी अपार्टमेंट के पास और आमा तालाब रोड गोकुलपुर आदि स्थान शामिल हैं। महापौर रामू रोहरा ने बताया कि 30 अवैध कॉलोनियों में से 13 को नियमित किया जा चुका है। 17 का प्रस्ताव नगर निवेश विभाग में लंबित हैं।


