कार्यकर्ताओं को शासकीय कर्मचारी का दर्जा व न्यूनतम वेतन दिया जाए

भास्कर न्यूज | बालोद शुक्रवार को नया बस स्टैंड में जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं ने विभिन्न मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संघ के पदाधिकारी एवं सदस्य दिनभर नारेबाजी करते रहे और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। संघ की प्रदेश महामंत्री माधुरी रथ ने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत संचालित समेकित बाल विकास योजना वर्ष 1975 से पूरे देश में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से संचालित हो रही है। देशभर में लगभग 24 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं कार्यरत हैं। वे 6 वर्ष तक के बच्चों के पोषण, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल, अनौपचारिक शिक्षा, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं को पूरक पोषण, विटामिन एवं प्रोटीन उपलब्ध कराने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। इसके अतिरिक्त राज्य शासन द्वारा बीएलओ ड्यूटी, आर्थिक एवं सामाजिक सर्वेक्षण, जनगणना, पल्स पोलियो, फाइलेरिया, ई-श्रम कार्ड, ई-केवाईसी, आधार सत्यापन, कोरोना वैक्सीनेशन एवं राशनकार्ड सत्यापन जैसे अनेक कार्य भी आंगनबाड़ी कर्मियों से कराए जाते हैं। इस प्रकार केंद्र एवं राज्य की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रतिदिन 8 घंटे से अधिक कार्य करने के बावजूद उन्हें न तो शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया गया है और न ही न्यूनतम वेतन के दायरे में लाया गया है। सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं अब तक लागू नहीं: संयुक्त मंच की जिलाध्यक्ष नीरा साहू ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा सहित अन्य सुविधाएं आज तक लागू नहीं की गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शासकीय कर्मचारियों के समान कार्य लेने के बावजूद आंगनबाड़ी कर्मियों को कर्मचारी घोषित नहीं करना और अल्प मानदेय में कार्य लेना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 एवं 23 का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 की वैधानिक व्यवस्थाओं के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों एवं प्री-प्राइमरी स्तर पर बच्चों को शिक्षा एवं पोषण उपलब्ध कराना कानूनी दायित्व है। धरना स्थल पर दुर्गा लावत्रे, ललिता जामडार, सरस्वती सेवता, धनेश्वरी, रमीला, देवकी, नेहा ठाकुर, सहित बड़ी संख्या में सहायिका व कार्यकर्ता उपस्थित रही।

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