भास्कर न्यूज | चिरमिरी शासकीय मां महामाया महाविद्यालय खड़गवां और शासकीय लाहिड़ी स्नातकोत्तर महाविद्यालय चिरमिरी के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विकसित भारत 2047 भारतीय ज्ञान परंपरा के परिप्रेक्ष्य में समग्र व समावेशी विकास विषय पर केंद्रित यह संगोष्ठी हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन और ऑफलाइन) में आयोजित हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन, राजगीत और राष्ट्रगीत के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा के कुलसचिव प्रो. राजेंद्र लाखपाले उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संरक्षक व प्राचार्य डॉ. आरती तिवारी ने की। विशिष्ट अतिथि डॉ. मोहन लाल चादर (अमरकंटक विश्वविद्यालय) ने भारतीय परंपरा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता प्रो. जैन पाण्डेय (अंबिकापुर) ने विकसित भारत की आर्थिक रूपरेखा और समावेशी विकास की आवश्यकता को रेखांकित किया। एमिनेंट स्पीकर डॉ. शिवाकांत त्रिपाठी ने भारतीय इतिहास व संस्कृति की वैश्विक महत्ता पर व्याख्यान दिया। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. एससी चतुर्वेदी व डॉ. अजय कुमार सोनी ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसे शोधार्थियों के लिए एक वैचारिक मंच बताया। तकनीकी सत्रों में अंतरराष्ट्रीय विद्वान डॉ. सुदर्शन सिंह वर्चुअल माध्यम से जुड़े। इसके अलावा गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर और सूरजपुर के प्राध्यापकों ने भी अपने विचार साझा किए। संगोष्ठी में भारतीय ज्ञान परंपरा और सतत विकास, शिक्षा सुधार और सांस्कृतिक विरासत और आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप विषयों पर शोध पत्र पढ़े गए। समापन सत्र में नगर पालिका निगम चिरमिरी के महापौर रामनरेश राय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा और अनुसंधान ही विकसित भारत की असली आधारशिला हैं। इस आयोजन को सफल बनाने में दोनों महाविद्यालयों के शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक स्टाफ का विशेष योगदान रहा।


