भास्कर न्यूज | अमृतसर श्री अकाल तख्त के जत्थेदार की रोक के बावजूद दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से इजलास के आयोजन पर प्रधान हरमीत सिंह कालका, महासचिव जगदीप सिंह काहलों व अन्य पदाधिकारी अकाल तख्त सचिवालय में जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज के समक्ष पेश हुए। जत्थेदार गड़गज्ज एवं डीएसजीपीसी पक्ष उक्त डेलीगेट्स इजलास को लेकर आमने-सामने हैं। इसे लेकर दोनों पक्षों की अलग अलग राय हैं। मतभेदों के बीच जहां डीएसजीपीसी प्रधान हरमीत सिंह कालका ने कहा कि अकाल तख्त साहिब की तरफ से इजलास रोकने के लिए जिस अकाली वर्कर जतिंदर सिंह सोनू को भेजा गया था, उस व्यक्ति ने जत्थेदार गड़गज्ज का संदेश बैठक शुरू होने के बाद देरी से देने के नतीजतन इजलास को रोका नहीं जा सका था। जबकि दूसरी तरफ जत्थेदार गड़गज्ज ने साफ किया कि इजलास रोकने के लिए संदेश जतिंदर सोनू नहीं बल्कि दिल्ली मिशन के प्रमुख मनमीत के हाथ 2 दिन पहले ही भेजा गया था। उन्होंने कहा कि अकाल तख्त के आदेशों की उल्लंघना के नतीजतन ही आज कालका व अन्यों को स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया गया था। पूछने पर जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि उक्त मामले पर जल्द ही सिंह साहिबान की बैठक में विचार किया जाएगा। कालका ने कहा कि इस इजलास में कई अहम फैसले लिए गए थे। अमृतसर| डीएसजीपीसी के प्रधान हरमीत सिंह कालका ने एसजीपीसी की ओर से श्री हरमंदर साहिब के हेडग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह को जबरन सेवामुक्त करने की कार्रवाई की निंदा की है। कालका ने कहा है कि सिख पंथ ज्ञानी रघबीर सिंह के साथ है, डीएसजीपीसी भी उनके साथ है। अगर ज्ञानी रघबीर सिंह डीएसजीपीसी में किसी भी पद पर नौकरी करना चाहें तो उनके लिए कमेटी के दरवाजे 24 घंटे खुले हैं।


