100 साल बाद दुर्लभ संयोग, चंद्र ग्रहण 3 मार्च को, उसी के साये में 4 मार्च को मनाया जाएगा रंगों का पर्व होली

भास्कर न्यूज | जालंधर हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है। सनातन धर्म में इसका खास महत्व है। चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा तिथि पर लगता है। इसी कारण होलिका दहन और होली की तारीखों में थोड़ा बदलाव और उत्साह दोनों हैं। इस वर्ष चंद्र ग्रहण के कारण ज्योतिषीय गणनाओं में कुछ विशेष संयोग बन रहे हैं। पं. गौतम भार्गव, पं. संतोष शास्त्री ने बताया कि पूर्णिमा तिथि 2 मार्च शाम 5:55 से लेकर 3 मार्च शाम 5:07 बजे तक रहेगी। इस दौरान 2 मार्च को ही होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6:22 से 08:50 के बीच रहेगा। विद्वानों के अनुसार 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह एक दुर्लभ संयोग है, जोकि करीब 100 साल बाद होली के अवसर पर बन रहा है। चंद्र ग्रहण का सूतक काल सुबह 6:23 बजे से शुरू होगा और ग्रहण दोपहर 3:20 से शाम 6:47 बजे तक रहेगा। इस दौरान धार्मिक कार्य नही हो पाएंगे। ग्रहण मोक्ष शुद्ध के बाद चांद बिंब के दर्शन एवं तर्पण के पश्चात शुभ कार्य किए जाएंगे। विद्वानों के मुताबिक इस बार होली 4 मार्च को ही मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता अनुसार ग्रहण के समय धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ पर रोक और मंदिरों के कपाट बंद किए जाते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद घर को गंगा जल से शुद्ध कर लेना चाहिए। घर के मंदिर में देवी-देवताओं का गंगा जल से अभिषेक करना चाहिए। इस दिन किया गया दान करने का महत्वपूर्ण है।

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