भास्कर न्यूज | जालंधर जिले का सबसे पुराना फ्लावर शो इस वर्ष 8 मार्च को कैंट स्थित जवाहर गार्डन में आयोजित किया जाएगा। प्रदर्शनी में कई किस्मों के फूल आकर्षण का केंद्र होंगे, जिनमें स्वीट विलियम विशेष रूप से शामिल है। यह फूल वीरता और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इसकी खासियत यह है कि पौधे की ऊपरी टहनियों को हल्के से काटने (पिंचिंग) के बाद उसी स्थान से नई शाखाएं विकसित होती हैं, जिन पर घने और सुंदर फूल खिलते हैं। यही तैयार पौधे फ्लावर शो में प्रदर्शित किए जाते हैं। बागबानी प्रेमियों ने अक्टूबर-नवंबर माह में इन पौधों को लगाया था। बेहतर आकार, पारंपरिक रंग और मजबूत पौधे तैयार करने के लिए महीनों तक निरंतर देखभाल और मेहनत की गई है। प्रतियोगिता में केवल फूलों ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार के पौधों की अन्य श्रेणियों में भी मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। इनमें पत्तेदार सजावटी पौधे जैसे एस्पैरागस, कोलियस और क्रोटोन, कैक्टस एवं सक्युलेंट्स (कम पानी में पनपने वाले पौधे), बोनसाई तथा औषधीय पौधों की श्रेणी में एलोवेरा सहित अन्य पौधे भी शामिल रहेंगे। इन फूलों पर नजर एस्टर, कार्नेशन, सिनेरारिया, डाहलिया, नेमेसिया, जेरेनियम जोकि बालकनी और बगीचों की सजावट के लिए उपयुक्त होता है, के अलावा पैंजी जो चेहरे जैसी आकृति वाला होता है, भी दिखेगा। इसके अलावा गुच्छों में खिलने वाला फ्लॉक्स, साल्विया, पेटूनिया, स्वीट विलियम – द्विवार्षिक पुष्प, जो बगीचों की शोभा बढ़ाता है। वर्बेना, स्टॉक्स, एंटीरिनम (डॉग फ्लावर), सजावटी फूल। रैननकुलस, डैफोडिल, चिन्चेरिन्ची, ऑर्निथोगैलम, आईरिस, लिली आदि प्रदर्शनी की शोभा बढ़ाएंगे। प्रतियोगिता की कैटागरीज ग्रुप ए (आम नागरिक): इसमें पब्लिक गार्डन, प्राइवेट गार्डन (छोटा और बड़ा) और किचन गार्डन के मुकाबले होंगे। एंट्री फीस 20 से 150 रुपए तक है। -ग्रुप बी (रक्षा कर्मी) : सेवारत और रिटायर्ड रक्षा कर्मियों के लिए रेजिमेंटल गार्डन, ऑफिसर्स मेस और उनके प्राइवेट गार्डन के लिए अलग से श्रेणियां हैं। ग्रुप सी (ओपन टू ऑल): इसमें गमलों में लगे फूल और बोनसाई के मुकाबले होंगे। माली के लिए हार और गुलदस्ता प्रतियोगिता पूरी तरह मुफ्त रखी गई है। नियमों का रखें ध्यान गमलों वाली प्रतियोगिता के लिए एक एंट्री में 3 गमलों का होना जरूरी है। जिनका साइज 10 से 12 इंच होना चाहिए। कट-फ्लावर श्रेणी में हर क्लास में 6 टहनियां दिखानी होंगी।


